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जेल के अस्पतालों में मामूली रोग बनाए जा रहे गंभीर

Wed, 14 Dec 2016 11:40 PM IST
पुनीत शर्मा
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जिला जेल
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जेल के अस्पतालों में एक बड़ा ‘खेल’ सामने आया है। रसूखदार बंदी मामूली रोग को भी गंभीर बीमारी दिखाकर खुद को जिला अस्पताल में रेफर करा रहे हैं। इस प्रकार के 19 मामले सामने आने के बाद शासन ने जांच बैठा दी है। आठ डीजीआईजी की टीमों को लगाया है। जिनके बारे में शिकायतें हैं उनमें पूर्व मंत्री, पूर्व विधायकों के साथ विभिन्न मामलों में सजा काट रहे अधिकारी भी शामिल हैं।
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उत्तर प्रदेश में 69 कारागार हैं। इन जेलों में मौजूदा समय में 94 हजार बंदियों को रखा गया है। जेल प्रशासन का सबसे बड़ा सिरदर्द बने हैं रसूखदार बंदी। इनमें पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और एमएलए के साथ कई बड़े अधिकारी शामिल हैं। इन लोगों को जेल में विशेष सुविधाएं देने की शिकायत गूंज रही हैं। शासन से लेकर प्रशासन तक हल्ला मचा है लेकिन कुछ एक्शन नहीं हो पा रहा है। 

सबसे ज्यादा शिकायत पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जेलों के लिए हैं। इनमें गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, बरेली, अलीगढ़ और मथुरा हैं। शिकायतों में 19 मामले तो ऐसे हैं जिनमें बंदियों ने मामूली बीमारी में भी खुद को जेल के अस्पताल से रेफर कराकर जिला अस्पताल में भर्ती करा लिया है। इन बंदियों को जिला अस्पताल में रहते हुए लंबा वक्त हो गया है मगर बीमारी ठीक होने का नाम नहीं ले रही हैं। 
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एडीजी कारागार गोपाल लाल मीना ने बताया कि बंदियों को जेल प्रशासन द्वारा सुविधाएं मुहैया कराए जाने की शिकायत आ रही हैं। इन शिकायतों की जांच के लिए आठ डीआईजी जेल की टीम बनाई गई हैं। जो बंदी मौजूदा समय में जिला अस्पताल में रह रहे हैं उनकी सेहत की जांच कराई जाएगी। यह दिखवाया जाएगा कि क्या वाकई वह अस्पताल में भर्ती होने योग्य हैं या फिर ऐसे ही खुद को रेफर करा लिया है। 

इन बिंदुओं पर होगी जांच
- अस्पताल में भर्ती बंदी को क्या रोग है
- क्रास चेकिंग के लिए मेडिकल टेस्ट कराए जाएंगे
- कितने दिन से अस्पताल में हैं और कितनी दफा रेफर हुए
- अस्पताल के डाक्टरों की रिपोर्ट भी चेक की जाएगी
- जेल प्रशासन की भूमिका की भी जांच होगी

लखनऊ मुख्यालय की टीम करेंगी छापामारी
प्रदेश की जेलों में छापामारी की जाएगी। इसके लिए मुख्यालय पर टीमों का गठन कर दिया गया है। एडीजी कारागार के साथ ही दूसरे अधिकारी भी शिकायत को तत्काल चेक करेंगे। एडीजी कारागार ने बताया कि जीएल मीना ने बताया कि मुख्यालय पर टीमों का गठन कर दिया गया है।
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