मथुरा। लाइव चैटिंग एप चैमेट के जरिये चीन की कंपनी के इशारे पर चल रहे करोड़ों रुपये की अवैध कमाई का खुलासा होने के बाद अब राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। फ्रेंचाइजी के माध्यम से संचालित इस नेटवर्क के तार देश के विभिन्न हिस्सों तक फैले हुए हैं। पुलिस और एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं इस नेटवर्क का इस्तेमाल गोपनीय सूचनाएं जुटाने या उन्हें विदेश भेजने के लिए तो नहीं किया जा रहा था।
साइबर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच आशंका जताई जा रही है कि ऐसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं रह सकता। फर्जी प्रोफाइल और संदिग्ध गतिविधियों के जरिये उपयोगकर्ताओं को जाल में फंसाकर उनकी निजी जानकारियां हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। जांच में सामने आया है कि चैमेट एप में 160 से अधिक गंभीर तकनीकी सुरक्षा खामियां पाई गई थीं। इन खामियों के जरिये फोन में अनधिकृत पहुंच बनाने, कैमरा और माइक्रोफोन का दुरुपयोग करने तथा ईमेल जैसे संवेदनशील डेटा तक पहुंचने का खतरा सामने आया था।ऐसे एप पर फर्जी या एआई से तैयार प्रोफाइल के जरिये लोगों को भरोसे में लेना आसान हो सकता है। इसके बाद निजी वीडियो कॉल रिकॉर्ड कर ब्लैकमेलिंग की आशंका रहती है। यदि कोई अधिकारी या महत्वपूर्ण पद पर बैठा व्यक्ति इस जाल में फंस जाए, तो उसके पास मौजूद संवेदनशील जानकारियां, पासवर्ड और गोपनीय दस्तावेज तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा सकती है। यही वजह है कि इस मामले को साइबर अपराध के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के जरिये से भी देखा जा रहा है।
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रक्षा प्रतिष्ठानों में पहले से प्रतिबंध
भारतीय सेना और रक्षा प्रतिष्ठानों में सुरक्षा कारणों से कई जोखिमपूर्ण मोबाइल एप के इस्तेमाल पर प्रतिबंध संबंधी निर्देश पहले भी जारी किए जा चुके हैं। चीन के राष्ट्रीय खुफिया कानून को लेकर भी डेटा सुरक्षा संबंधी चिंताएं उठती रही हैं। ऐसे में विदेशी सर्वर पर डेटा भेजने की आशंका वाले एप जांच एजेंसियों के रडार पर रहते हैं।
फ्रेंचाइजी कनेक्शन और डिजिटल गतिविधियों की हो रही जांच
मथुरा में पकड़े गए तीन आरोपियों के पास अब तक कोई संवेदनशील गोपनीय जानकारी मिलने की बात सामने नहीं आई है। इसके बावजूद पुलिस और एसटीएफ नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन, फ्रेंचाइजी कनेक्शन और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही हैं। अगस्त 2023 में गूगल प्ले स्टोर से चैमेट एप हटाए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई है। बाद में इसे चिलचैट के नाम से शुरू किया गया।
मथुरा में पकड़े गए तीनों आरोपी फ्रेंचाइजी पर एप का इस्तेमाल कर रहे थे। इनके पास कोई गोपनीय जानकारी नहीं मिली है। जांच में सामने आया है कि इस एप का इस्तेमाल पूरे देश में हो रहा है। सुरक्षा एजेंसी ने ही विदेश से फंडिंग होने पर इसकी जानकारी लखनऊ एसटीएफ को दी थी। इसके अलावा अन्य पहलुओं पर भी जांच की जा रही है। - श्लोक कुमार, एसएसपी