गिरिराज परिक्रमा करते विदेशी भक्त।
राधाकुंड। कार्तिक मास में ब्रजमंडल की आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर है। इसी क्रम में विश्व प्रसिद्ध राधाकुंड नगरी में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है। विशेषकर विदेशी भक्त ब्रज की संस्कृति और भक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आ रहे हैं।
कार्तिक स्नान और अनुष्ठानों के तहत, विदेशी भक्तों ने जल स्वरूप विराजमान श्री राधारानी का आचमन चरणामृत पवित्र जल ग्रहण किया। इसके उपरांत उन्होंने सप्तकोशीय गिरिराज परिक्रमा की शुरुआत की। राधाकुंड के तट पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। जल स्वरूप श्री राधा रानी के आचमन के बाद विदेशी भक्तों का जत्था पारंपरिक वेशभूषा में आगे बढ़ा। उनके हाथों में करताल और मंजीरा थे। हरे कृष्ण हरे राम के महामंत्र और हरि नाम संकीर्तन की गूंज से पूरा परिक्रमा मार्ग गुंजायमान हो उठा। भक्तों के हाथों में भगवा पताकाएं थीं और उनके चेहरे पर भक्ति भाव देखते ही बन रहा था। मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक मास में गिरिराज परिक्रमा करने और हरि नाम संकीर्तन का अनंत पुण्य फल प्राप्त होता है। विदेशी भक्तों की इस अनूठी निष्ठा और भक्ति को देखकर स्थानीय लोग भी अभिभूत हैं। परिक्रमा मार्ग पर जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा भक्तों का स्वागत किया जा रहा है।