कान्हा मोर बन आयौ, मोरन के दरशन करन मन राधे-राधे लेत हिलौरें, गहवर वन में घूमती वहां नाय पायौ मोर... ब्रज के इस लोकगीत को अपनी कला से प्रदर्शित कर लोक कलाकार ओमप्रकाश डांगुर ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। अपनी इस प्रतिभा के दम पर उन्हें अखिल भारतीय स्तर पर तीसरा स्थान हासिल हुआ है।
भारत संचार निगम लिमिटेड ने अखिल भारतीय सांस्कृतिक प्रतियोगिता का आयोजन भुवनेश्वर, उड़ीसा में कराया था। इसमें देश के 23 परिमंडलों के 300 से अधिक कलाकारों ने प्रतिभाग किया। मथुरा के ओम प्रकाश डांगुर ने लोकगीत प्रतियोगिता में ब्रज के लोक गीत ‘कान्हा मोर बन आयौ...’ की प्रस्तुति की।
लोक गीत गायन के दौरान डांगुर ने कई वाद्य यंत्रों की आवाज के साथ ही मोर, पपीहा और अन्य पशु पक्षियों की आवाज अपने कंठ से निकालकर उपस्थित लोगों को हतप्रभ कर दिया। उन्हें शील्ड व प्रमाण पत्र मुख्य महा प्रबंधक अशोक शर्मा ने दिए। मथुरा आने पर डांगुर को वरिष्ठ महाप्रबंधक दूरसंचार जीपी त्रिपाठी और वरिष्ठ रंगकर्मी देवेंद्र पाल ने सम्मानित किया। डांगुर की इस उपलब्धि पर भारतीय जन नाट्य संघ के पदाधिकारियों ने भी बधाई दी है।