रिफाइनरी की गेंट्री में पेट्रोलियम पदार्थों में अचानक आग लग गई। रिफाइनरी की गेंट्री में तेल के ड्रमों में यह आग उस वक्त लगी जब 18 थानों की पुलिस रिफाइनरी के आसपास मॉकड्रिल कर रही थी। पहले कुछ लोगों ने इसे मॉक ड्रिल का हिस्सा समझा, बाद में सच्चाई पता चलते ही पुलिस उधर दौड़ पड़ी। करीब एक घंटे में पुलिस और दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया।
शुक्रवार सुबह 8:30 बजे एसपी सिटी एसपी सिटी शैलेश पांडेय गोवर्धन, महावन, राया, मांट, नौहझील, शेरगढ़, फरह, बरसाना, कोसीकलां, बलदेव, महावन, छाता, हाईवे, कोतवाली, सदर बाजार, वृंदावन सहित 18 थानों की पुलिस के साथ रिफाइनरी की सुरक्षा और आपात स्थिति में किए जाने उपायों को लेकर मॉकड्रिल कर रहे थे। इसी दौरान सुबह 9:30 बजे रिफाइनरी की केएस-वन गेंट्री (रेलवे के टैंक बैगनों में पेट्रोलियम पदार्थ भरने का स्थान) में फैले और कुछ ड्रमों में रखे पेट्रोलियम पदार्थों में अचानक आग लग गई।
आग की तेज लपटें देख गेंट्री में काम कर रहे रिफाइनरी कर्मियों में हड़कंप मच गया। इसकी सूचना पुलिस, कंट्रोल रूम और रिफाइनरी की फायर ब्रिगेड को दी गई। मॉक ड्रिल बीच में छोड़ एसपी सिटी फोर्स के साथ आग पर काबू करने के प्रयासों में जुट गए। रिफाइनरी की चार दमकल आग पर काबू पाने के लिए लगीं। छह गाड़ियों को पानी डालकर आग पर काबू पाने में लगभग एक घंटा लग गया।
आग लगने के कारणों में तेल चोरों को खोज रही पुलिस
रिफाइनरी की गेंट्री से पेट्रोलियम पदार्थों की तेल चोरी होना लगातार जारी है। गेंट्री में कर्मचारियों को मोबाइल, माचिस, बीड़ी सिगरेट आदि सामान ले जाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद भी गेंट्री में आग लग जाने से सवाल उठ रहे है, यह भी आशंका है कि कहीं तेल की चोरी तो नहीं हो रही थी, जिसे छिपाने के लिए आग लगाई हो। इससे पूर्व 2012 में आठ मई को रिफाइनरी से तेल चोरी कर निकाले गए चार पेट्रोल टैंकरों में एक निजी बाड़े में आग लग गई थी। उसमें रिफाइनरी की 60 लाख की फोम खर्च हुई थी। उस मामले में भी रिफाइनरी पुलिस ने लीपापोती कर दी।