एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने से सरकार के खजाने को भारी नुकसान हो रहा है। सर्वाधिक रेवेन्यू आबकारी से प्राप्त होता था लेकिन अब प्रदेश में शराब की बिक्री पचास फीसदी घट गई है। कई जिलों में तो गिरावट इससे भी कहीं ज्यादा है। मथुरा में ही साठ प्रतिशत बिक्री कम हो गई।
उत्तर प्रदेश में शराब की 24,000 दुकानें हैं। इसमें अंग्रेजी, देसी और बीयर शॉप हैं। जो आंकड़ा है उसके मुताबिक एक माह में तकरीबन 1,100 करोड़ रुपये का रेवेन्यू आबकारी विभाग को शराब की बिक्री से हासिल होता है। कुछ महीनों में तो आंकड़ा बढ़कर 1300 करोड़ तक भी पहुंच जाता है।
लेकिन 1000 और 500 के नोट बंद होने से पिछले तीन दिनों के भीतर बिक्री 50 फीसदी गिर गई है। मेरठ, सहारनपुर, गोरखपुर, आजमगढ़, कानपुर, बरेली, मुरादाबाद और झांसी मंडल में जहां शराब की बिक्री सबसे ज्यादा होती थी वहां अब गिरावट भी ज्यादा है। इन मंडलों के कई जिले तो ऐसे हैं जिनमें गिरावट साठ फीसदी तक पहुंच गई है।
आबकारी आयुक्त भवनाथ सिंह का कहना है कि मौजूदा समय में विभाग को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। टारगेट को हासिल करना भी मुश्किल हो जाएगा। हर जिले से जो रिपोर्ट आ रही है उसके मुताबिक दुकानों पर शराब की बिक्री पचास फीसदी घट गई है। कुछ दुकानें तो ऐसी भी हैं जहां पूरे दिन में शराब की दस बोतलें नहीं बिक पाई हैं। लोगों के पास खुले पैसे हैं नहीं और एक हजार और पांच सौ का नोट सेल्समैन ले नहीं रहे हैं।
आदेश भी हो गया है कि किसी दुकान पर यह बड़े नोट नहीं लिए जाएंगे। मयखानों में भी खामोशी छा गई है। स्थिति यह है कि यह लोग अपना खर्च भी नहीं निकाल पा रहे हैं। मथुरा में ही करीब बारह बार हैं। आठ बड़े होटलों में भी बार की व्यवस्था है लेकिन इन दिनों तो यहां भी उदासी छाई हुई है। किसी भी बार पर इतनी बिक्री नहीं बची जो लेबर का खर्च भी निकाल सकें। बताया जा रहा है कि बीयर की बिक्री में भी बड़ी तेजी के साथ गिरावट आई है। जिस बीयर शाप पर हर रोज 300 तक बीयर की बोतल बिक जाया करती थीं वहां मुश्किल से 50 भी नहीं बिक पा रही हैं।