वृंदावन। राधारानी के प्राकट्य पर्व राधाष्टमी पर इस बार वृंदावन भक्ति और उत्सव के रंग में रंगा नजर आएगा। ठाकुर बांकेबिहारी की नगरी में 19 सितंबर को रसिकाचार्य स्वामी हरिदासजी महाराज का 489 वां पाटोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। दोपहर में बांकेबिहारी मंदिर में वर्ष में केवल एक बार होने वाली ‘बैनीगूंथन’ निकुंजलीला का मंचन होगा। शाम होते ही मंदिर से निधिवन राज तक बधाई की सवारी निकलेगी।
राधाष्टमी से पहले ही ब्रज में उत्सवी माहौल बनने लगा है। 11 सितंबर की कुशोत्पाटिनी अमावस्या से 26 सितंबर की भाद्रपद पूर्णिमा तक अलग-अलग तिथियों पर पर्व और धार्मिक आयोजन होंगे। मंदिरों और देवस्थानों में इन आयोजनों की तैयारियां शुरू हो गई हैं। श्रीबांकेबिहारी महाराज के वरिष्ठ सेवायत एवं इतिहासकार आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने बताया कि राधाष्टमी के दिन पाटोत्सव की शुरुआत प्राचीन श्रीहरिदासपीठ मंदिर में स्वामी हरिदासजी महाराज के महाभिषेक से होगी। यमुनाजल, गुलाबजल, इत्र, केसर, दूध, दही, घी, शहद और बूरा आदि से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में राजभोग आरती के पश्चात दोपहर करीब तीन बजे से शाम पांच बजे तक ‘बैनीगूंथन’ नामक निकुंजलीला का मंचन होगा।
बधाई गायन करते हुए निधिवन पहुंचेंगे गोस्वामी
शाम करीब सात बजे ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर से बधाई सवारी शुरू होगी। इसमें अनेक बैंड-बाजों के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक झांकियां शामिल होंगी। गोस्वामी समाज के लोग समाज गायन करते हुए निधिवन राज की ओर प्रस्थान करेंगे। शोभायात्रा के मार्ग में श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। रात करीब एक बजे सवारी के निधिवन राज पहुंचने के बाद बधाई गायन और प्रसाद वितरण होगा। इसके साथ राधाष्टमी के इस विशेष उत्सव का समापन किया जाएगा।
11 सितंबर से शुरू होगी पर्वों की श्रृंखला
आचार्य प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी के अनुसार 11 सितंबर को कुशोत्पाटिनी अमावस्या से महोत्सवीय क्रम शुरू होगा। 12 सितंबर को स्वामी हरिदासजी की धर्मपत्नी सती हरिमति का स्मृतिपर्व, 13 सितंबर से स्वामी हरिदासजी के बधाई उत्सव का शुभारंभ और 14 सितंबर को गणेश उत्सव होगा। 15 सितंबर को ऋषि पंचमी तथा 17 सितंबर को बल्देव छठ और ललिता जयंती के आयोजन होंगे। राधाष्टमी के बाद 22 सितंबर को पद्मा एकादशी, 23 को वामन द्वादशी, 24 को प्रदोष व्रत और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। 26 सितंबर को पूर्णिमा व्रत, स्नान, दान और श्राद्ध आदि के पुण्यकाल के साथ महालय यानी श्राद्ध पक्ष का आरंभ होगा।