चौमुहां (मथुरा)। धान की रोपाई का सीजन शुरू हो गया है, लेकिन सिंचाई व्यवस्था की बदहाली किसानों की चिंता बढ़ा रही है। शेरगढ़ रजवाहा और उससे जुड़े माइनरों में अभी तक पानी नहीं छोड़ा गया है। वहीं जलकुंभी के घने जाल से जल प्रवाह का रास्ता भी बाधित हो रहा है। सिंचाई विभाग की उदासीनता से नाराज किसानों ने खुद जिम्मेदारी उठाते हुए आपस में चंदा कर जेसीबी मशीन लगवाकर शेरगढ़ रजवाहा से परखम रोड तक करीब दो किलोमीटर हिस्से की सफाई करा दी।
चौमुहां ब्लॉक के अकबरपुर, आझई, तरौली, पिल्होरा, जैत, सिहाना, चौमुहां सहित आसपास के गांवों के किसान इन दिनों धान की रोपाई में जुटे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह शेरगढ़ रजवाहा और उससे जुड़े माइनरों पर निर्भर है, लेकिन वर्षों से नियमित सफाई नहीं होने के कारण इनमें जलकुंभी फैल गई है। ऐसे में पानी छोड़े जाने के बाद भी खेतों तक पहुंचना मुश्किल होगा।
किसान सुनहरी पहलवान ने बताया कि रजवाहा और माइनरों की सफाई के लिए कई बार सिंचाई विभाग के अधिकारियों से मांग की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूर होकर किसानों ने चंदा कर धनराशि जुटाकर जेसीबी से सफाई कराई, ताकि पानी आने पर उसका प्रवाह बाधित न हो। किसान मदन गोपाल ने कहा कि समय रहते पूरे माइनर की सफाई नहीं हुई तो धान की फसल प्रभावित होगी और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं अकबरपुर निवासी सहदेव सिंह ने बताया कि शेरगढ़ रजवाहा पूरी तरह जलकुंभी से पट चुका है। पानी नहीं मिलने के कारण किसान ट्यूबवेल के सहारे धान की रोपाई कर रहे हैं, जिससे सिंचाई लागत बढ़ रही है। किसान बाबू सिंह, पप्पू सिंह, नेकराम, चेतन पहलवान, कन्हैया लंबरदार, सूरज बाबू सिंह, मोहन सिंह, धर्मेंद्र सिंह, पोपलिया और मान सिंह सहित अन्य किसानों ने जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग से शेष रजवाहों एवं माइनरों की तत्काल सफाई कराकर शीघ्र पानी छोड़े जाने की मांग की है।
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इस संबंध में एक्सईएन सिंचाई विभाग नवीन कुमार ने बताया कि विभाग द्वारा रजवाहों की सफाई अक्तूबर नवंबर माह में कराई जाती है। अभी 15 दिन पहले पानी चला है। कहीं से इस प्रकार शिकायत विभाग को नहीं मिली है।