नोटबंदी से किसान क्रेडिट कार्ड धारक किसान भी प्रभावित हो रहे हैं। इस समय गेहूं और आलू की फसल की सिंचाई करने और खाद लगाने का समय है, लेकिन रकम की अभाव में यह कार्य अटका हुआ है। केसीसी धारकों के खाते में रकम ट्रांसफर न होने के कारण न तो वह खाद खरीद पा रहे हैं और न सिंचाई करने के लिए डीजल।
जिले में तीन लाख से अधिक किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड के खाते हैं। बैंककर्मी लोन जमा होने के बाद भी उनके खोले गए सेविंग खाते में केसीसी रिन्यूअल का पैसा ट्रांसफर नहीं कर रहे हैं। नगला तेजा के किसान डिगम्बर सिंह का कहना है कि उन्होंने अक्तूबर में आलू की फसल बेची थी। 10 नवंबर को व्यापारी ने पुराने नोटों से फसल की कीमत अदा की।
अब खाते का लोन चुकता कर दिया, लेकिन बैंककर्मी रिन्यूअल कर सेविंग में पैसा ट्रांसफर नहीं कर रहे। कारब के मुकेश कुमार ने बताया कि कारब स्थित ओबीसी पर दिनभर दलालों का जमावड़ा रहता है। किसान क्रेडिट कार्ड में लोन जमा होने के बाद भी री-लोन कर सेविंग एकाउंट में पैसा नहीं डाला गया है। कुछ पैसा जमा था उसे भी पूरा नहीं निकालने दे रहे। इससे यूरिया खाद और डीजल नहीं खरीद पा रहे।