भाई नौकरी से छुट्टी लेकर गांव आया था। अगले माह बहन की शादी थी तो सोचा फसल कटने के बाद रुपये का इंतजाम हो जाएगा। फिर बची हुई तैयारियां भी कर जाऊंगा और लाडो धूमधाम से विदा होगी। मगर, बेदर्द बारिश ने सारे सपने धो दिए। ओलावृष्टि से बर्बाद फसल देखकर भाई बहन की डोली उठने पहले ही विदा हो गया।
बलदेव के गांव जादोंपुर में किसान उम्मेद सिंह के यहां छाई खामोशी कई कहानियां कह जाती है। पति की मौत के बाद पत्नी नारंगी की तबीयत बिगड़ गई। परिवारीजनों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया है। वह होश में आते ही पति के बारे में पूछती है इसलिए अब कोई आंसुओं को बाहर नहीं आने देता।
मंगलवार को गांव पहुंची अमर उजाला की टीम को छोटे भाई मोहन ने बताया कि उम्मेद आरपीएफ में सिपाही थे। इस बार हमने अधिक पैदावार के लिए बैंक से दो लाख का ऋण लेकर फसल बोई थी। एक लाख का सहकारी समिति पर खाद-बीज का कर्जा था। उम्मेद को उम्मीद थी गेहूं की फसल से सब चुकता कर देंगे। 10 अप्रैल को वे छुट्टी लेकर आया और फसल देखने खेत पर चले गए।
वहां से लौटे तो गुमसुम थे। अचानक ऐसा सदमा लगा कि मौत साथ ले गई। मोहन बताया कि हमारी बहन मीरा की चार मई को शादी है। घर आने से पहले भाई ने फोन पर कहा था कि फसल अच्छी हुई तो लाडो की शादी में चार चांद और लगा दूंगा।