मौसम की मार से बर्बाद हुई फसल देखकर चौमुंहा ब्लॉक के गांव तरौली सुमाली निवासी किसान शिशुपाल ने आत्मदाह कर लिया। किसान पर छह लाख का कर्ज भी था। इलाज के लिए आगरा ले जाते समय उनकी मौत हो गई। बुधवार को इस घटना से लोग सन्न रह गए हैं। जिलाधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि मौके पर एसडीएम को भेजा है।
गांव तरौली सुमाली के मोहल्ला परुआ निवासी शिशुपाल (40) पुत्र गालिया ओलावृष्टि से फसल तबाह होने से बहुत परेशान थे। इन दिनों परिवारीजनों के साथ आसपास के लोगों से भी कम बातें करने लगे थे। बुधवार को शिशुपाल सुबह नौ बजे खेत से लौटने के बाद वह घर की छत पर चढ़ गए। यहां उन्होंने अपने शरीर पर मिट्टी का तेल छिड़क कर आग लगा ली।
छत पर अचानक आग की लपटें उठती देख परिवारीजन ऊपर भागे। यहां आग से घिरे शिशुपाल को देखकर पड़ोसियों ने भी चीखपुकार मचा दी। पल भर में लोग छत पर पहुंचकर शिशुपाल को आग की लपटों से बचाने में जुट गए। किसी तरह लोगों ने शिशुपाल के शरीर में लगी आग बुझाई। तब तक वह काफी जल चुके थे। इस हालत में उन्हें तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले गए जहां से आगरा रेफर कर दिया गया। आगरा ले जाते समय शिशुपाल की मौत हो गई।
शिशुपाल की पत्नी ब्रजलता ने बताया कि ओले पड़ने के बाद से ही वह तनाव में थे। बुधवार को सुबह खेत से लौटने के बाद किसी से ज्यादा बातचीत नहीं की। गांव के पूर्व प्रधान पूरन सिंह और पूर्व प्रधान प्रतिनिधि मलखान सिंह ने बताया कि शिशुपाल के पास एक एकड़ खेत है। उस पर करीब छह लाख रुपये कर्ज था जिसमें कुछ बैंक और कुछ लोगों से उधार लिया था।
शिशुपाल की चार संतान मानवेंद्र 16 वर्ष, सोनू 12 वर्ष, डोली आठ वर्ष और विमलेश उम्र छह वर्ष हैं। एक लड़की की शादी हो चुकी है। खेतीबाड़ी से ही परिवार का भरण पोषण हो रहा था। इस बार फसल अच्छी थी लेकिन कुदरत की मार से वह विचलित हो गए थे। घटना की सूचना पर डीएम राजेश कुमार के निर्देश पर एसडीएम छाता सुरेंद्र सिंह ने घटना स्थल पर पहुंचकर पीड़ित परिवार और पड़ोसियों से बातचीत की है।