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...गांव तक वह रौशनी आएगी कितने साल में

Sun, 05 Apr 2015 11:58 PM IST
आशीष कुमार शर्मा
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गांव बादौठ में रविवार को जब अमर उजाला की टीम किसान विशन सिंह के घर पहुंची तो यहां विधवा दलबीरी को दिलासा देने वालों की कतार लगी थी। इधर दलबीरी अपने बच्चों को ढांढस बंधा रही थी।
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विशन सिंह का सबसे बड़ा बेटा मोहित (12) गांव के विद्यालय में पढ़ रहा है। पूरे परिवार में एक मात्र कमाने वाले पिता की मौत के बाद उसे जिम्मेदारी महसूस होने लगी है। आंखों में आंसू लिए मोहित खेत में काम करने और मजदूरी करके परिवार को पालने की बातें करता है। वहीं बिटिया जती (16) और वर्षा (8) ने हालात को भांपकर स्कूल जाना ही बंद कर दिया है। छोटे बेटे अमित के आंसू भी रुक नहीं रहे। लोगों ने बताया कि विशन सिंह के पांच बेटियां और दो बेटे हैं। बेटी राधा, सीमा, मधु की शादी हो चुकी है। अब दलबीरी पर दो बेटियों और दो बेटों की जिम्मेदारी है।

गम के इस माहौल में कसक इस बात की है कि इस परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूटा लेकिन अब तक कोई नेता या अफसर यहां नहीं पहुंचा है। यह आलम तब है जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने साफ कहा है कि ऐसे हालात में यदि कोई किसान आत्महत्या करता है तो जिलाधिकारी मौके पर पहुंचें और शासन को सच्चाई से अवगत कराएं। जिससे पीड़ित परिवारीजनों की मदद की जा सके।
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परिवार पर है कर्ज
मृत किसान विशन सिंह पर दस बीघा खेत था। जिसमें उन्होंने गेहूं की फसल बोई। पांच साल पहले खेत गिरवी रखकर साहूकार से 1.5 लाख रुपये का कर्ज लिया जो अब और बढ़ गया। मई माह में साहूकार ने रकम और ब्याज अदा कर खेत छुड़ाने का अल्टीमेटम दिया था। उससे पहले ही प्रकृति मार ने सब कुछ छीन लिया। 
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