एकात्ममानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मभूमि पर लगने वाले
तीन दिवसीय जन्मोत्सव मेला के लिए अन्य जिलों से खेल-तमाशा संचालक और
दुकानदारों की आमद शुरू हो गई है। मेले की शुरुआत नौ अक्तूबर को होगी लेकिन
दीनदयाल धाम में उससे पहले ही रौनक दिखने लगी है।
आगरा के कमाल खां निवासी अजीत सिंह गुरुवार को बड़े झूले के साथ नगला
चंद्रभान आ गए। शुक्रवार को उनके दो साथी झूलों पर पेंट कर रहे थे। आगरा के
खंदौली के गांव सेंमरा के पप्पू पांच रोज पहले ही दीनदयालधाम आकर मिठाई
बेचने लगे हैं। पूछने पर इमरती बनाने में तल्लीन पप्पू बताते हैं कि मथुरा
और आसपास के जिलों में जुड़ने वाले मेले ही उनकी जिंदगी की गाड़ी खींचने
में सहायक हैं।
कई रोज से आसपास के गांवों के निवासियों के मुंह में जलेबी
और इमरती का रस धोल रहे पप्पू ने बताया कि कहीं बैठ कर कमाने से अच्छा तो
यह मेले हैं, जहां से परिवार की गाड़ी का पहिया पूरे आनंद से चलता है। उधर
जन्मोत्सव में आने वाले अतिथियों और संघ प्रचारकों को ठहराने के इंतजाम
तेजी पर हैं। दीनदयाल स्मारक और सेवा केंद्र के साथ उद्योग केंद्र की
व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जा रहा है। व्यवस्थाओं में लगे घनश्याम
गुप्ता को मेला की शुरुआत से पूर्व सभी इंतजाम बेहतर होने का विश्वास है।