मथुरा। गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों के पास पल-पल जाना ही नहीं उन्हें सेवा और सांत्वना से बेहतर भी करना है। इसमें स्वयं को बीमारी लगने का डर तो बना ही रहता है, पर दिल में सेवा का जज्बा उन्हें मरीजों का उपचार करने की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि कोरोना काल में भी जान की बाजी लगाकर नर्सों ने मरीजों की खूब सेवा की। हालांकि इस दौरान कई नर्सें बीमार होकर अस्पताल तक में भर्ती हुईं पर उन्होंने मरीजों की सेवा करना नहीं छोड़ा। नर्सिंग दिवस पर ऐसी ही महिलाओं से जब बात की तो उन्होंने इस पेशे में आने के संबंध में अपनी बेबाक राय रखी।
मदर टेरेसा से प्रेरणा लेकर चुना नर्सिंग का क्षेत्र
महिला अस्पताल की मैट्रन हेमलता शर्मा ने बताया कि मदर टेरेसा को अपना आदर्श मानती हैं। उन्हीं से प्रेरणा लेकर नर्सिंग के क्षेत्र को चुना। कोविड के दौरान मरीजों का इलाज करते हुए स्वयं भी बीमार हो गई लेकिन स्वस्थ होते ही पुन: ड्यूटी पर आ गई।
डॉक्टर बनना चाहती थीं नर्स बन कर रहीं सेवा
महिला अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी आरती सिंह ने बताया कि 2009 में अस्पताल में निजी नौकरी लगी, लेकिन 2019 में सरकारी नौकरी लगी। बताया कि वह डॉक्टर बनना चाहती थी लेकिन हाईस्कूल में नंबर कम आने के कारण सपना साकार नहीं हुआ।
पिता का सपना कर रहीं साकार
महिला अस्पताल की नर्सिंग अधिकारी मीशा सिंह ने बताया कि पिता का सपना था कि बेटी डॉक्टर या इंजीनियर बने लेकिन उम्र आड़े आने के कारण ऐसा नहीं हो पाया। नर्स के रूप में लोगों का सेवा करके वह अपने पिता का सपना साकार कर रही हैं।
फोटो कोविड में 14 दिन रहीं अस्पताल में भर्ती
जिला अस्पताल की मैट्रन सुनीता यादव ने बताया कि उनके पिता दरोगा हैं। वह भी दरोगा बनना चाहती थीं लेकिन नर्सिंग की परीक्षा पास करने के बाद उन्होंने इसी क्षेत्र में कार्य करना चुना। कोविड के दौरान बीमार हुई और 14 दिन अस्पताल में भर्ती रहीं।
बचपन से था लोगों की सेवा का भाव
जिला अस्पताल की नर्सिंग प्रभारी पूजा बघेल ने कहा कि बचपन से ही लोगों की सेवा करने का मन था। बस इसी भाव के कारण नर्सिंग के क्षेत्र को चुना। परिवार को समय न देना खलता है, लेकिन मरीज को स्वस्थ करने की खुशी इसको दूर कर देती है।
नर्स के कपड़ों ने किया प्रेरित
जिला अस्पताल की नर्सिंग प्रभारी उर्मिला ने बताया कि वह बहुत छोटी थी तब किसी बीमारी के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। इसी दौरान उन्होंने नर्स और उसकी पोशाक को देखा, तभी से सोच लिया कि नर्स बनकर लोगों की सेवा करनी है।
सुविधाओं का अभाव भी नहीं रोक पाता जज्बा
दिन-रात मरीजों की सेवा में लगी नर्सों को सुविधाओं के नाम पर केवल आश्वासन मिलता है। नर्सों ने बताया कि कुछ साल पहले उन्हें जिला अस्पताल में आवास मिला था लेकिन जर्जर होने के बाद खाली करा लिए गए। आपातकाल में रात को अस्पताल आने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। सरकार की ओर से कोई भत्ता भी नहीं मिलता है। पिछले तीन साल से वर्दी का भत्ता भी नहीं मिला है।
अपशब्द करते हैं परेशान
अस्पताल में जब गंभीर हालत में मरीज भर्ती होता है तो उसके परिजन का व्यवहार अच्छा रहता है, लेकिन जैसे-जैसे मरीज ठीक होता जाता है परिजन का व्यवहार बदलता जाता है। एक नर्स ने बताया कि कई बार तो मरीज के परिजन अपशब्द भी बोलते हैं। सब कुछ सुनने और सहने के बाद भी सेवा कार्य में लगी रहती हैं। परिवार से ज्यादा समय अस्पताल में मरीजों के बीच गुजरता है।