कोसीकलां में कंधों से गुजरकर राम-लक्ष्मण से मिलने जाते भरत-शत्रधुन।
कोसीकलां। अमित रूप प्रगटे तेहि काला। जथाजोग मिले सबहि कृपाला ॥ कृपादृष्टि रघुबीर बिलोकी। किए सकल नर नारि बिसोकी...। यानी उसी समय कृपालु श्री रामजी असंख्य रूपों में प्रकट हो गएऔर सबसे (एक ही साथ) यथायोग्य मिले। श्री रघुवीर ने कृपा की दृष्टि से देखकर सब नर-नारियों को शोक से रहित कर दिया।
श्री रामलीला संस्थान के तत्वाधान में शुक्रवार-शनिवार की रात्रि में भरत मिलाप चौक पर पुष्पक विमान में सवार राम-लक्ष्मण एवं माता जानकी से अयोध्या के द्वार पर भरत-शत्रुघ्न मिले तो हर किसी की आंखें नम थीं। मुख से एक ही स्वर हर-हर महादेव, सियावर रामचंद्र की जय... गूंज रहा था। रावण समेत राक्षसों के वध के साथ ही वनवास की अवधि पूरी कर प्रभु श्रीराम अयोध्या पहुंचे।
भरत-शत्रुघ्न सीमा पर अगवानी के लिए पहुंचे तो चारों भाइयों के मिलन की झांकी ने प्रेमियों को विभोर कर दिया। पुष्पक विमान पर सवार श्रीराम-सीता-लक्ष्मण वानर सेना संग आते हैं। पश्चिमी छोर से गुरु वशिष्ठ के साथ भरत-शत्रुघ्न व मंत्री सुमंत भी कुछ ही देर में पहुंच जाते हैं। भरत मिलाप की झांकी सजी। देव स्वरूपों के पुष्पक विमान से अयोध्या आने पर गुरु वशिष्ठ की आज्ञा से मंत्री सुमंत श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारी शुरू करते हैं। संवाद