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Mathura News: ज्यादा रासायनिक उर्वरक का प्रयोग जमीन को कर रहा बंजर

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मथुरा। फसल की अधिक पैदावार के चक्कर में किसान क्षमता से ज्यादा रासायनिक उर्वरक का प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे में फसलों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। खेतों की मिट्टी को भी भारी नुकसान पहुंचने के साथ जमीन भी बंजर हो रही है। जिले के 10 ब्लॉकों में 10 हजार मिट्टी के नमूनों की जांच प्रयोगशाला में की गई, जिसमें जैविक कार्बन न्यूनतम पाया गया। ज्यादातर ब्लॉकों में मिट्टी में जिंक की कमी सामने आई है। साथ ही फास्फोरस और पोटाश की मात्रा भी मध्यम मिली है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि खेतों में मिट्टी इसी तरह प्रभावित हुई तो फसलों का उत्पादन न के बराबर रह जाएगा।
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कृषि विभाग केंद्र के मृदा वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र कुमार राजपूत ने बताया कि खेतों की मिट्टी में सल्फर, जिंक, लोहा, कॉपर, मैग्नीज, बोरान, जीवांश कार्बन, फास्फोरस, पोटास, नाइट्रोजन होना आवश्यक है। एक भी पोषक तत्व की कमी होने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर होने लगती है। जिससे फसलों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के माध्यम से किसानों को मिट्टी की जांच कराई जा रही है। जिसके बाद किसानों को इसके नुकसान के बारे में भी बताया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि 10 ब्लॉकों में हुई जांच में भूमि में नाइट्रोजन 99 प्रतिशत कम, फास्फोरस 16 प्रतिशत कम, कार्बन 76 प्रतिशत कम, पीएच (लवणता) 20 प्रतिशत मिट्टी में कम पाया गया। ब्लॉक बलदेव, चौमुहां, छाता, फरह, मथुरा, नंदगांव, नौहझील में जिंक की मात्रा अपेक्षा से काफी कम जांच में पाई गई। इसके अलावा सभी ब्लॉकों में जैविक कार्बन की मात्रा न्यूनतम मिली। फास्फोरस और पोटाश की मात्रा मध्यम मिली है। संवाद
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110 किसानों ने कराई मिट्टी की जांच
ब्लॉक छाता में एसवीसी किसान सेंटर द्वारा 110 किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच की गई, जिसमें विद्युत चुबंकीय, सल्फर, जैविक कार्बन की कमी जांच रिपोर्ट में सामने आई। चंबल फर्टिलाइजर के डाॅ. जयप्रकाश पांडे ने बताया कि किसानों को मिट्टी की जांच जरूर कराना चाहिए। जिसकी कमी हो वह उर्वरक फसल में डालें। डॉ. रोहित पाटीदार ने बताया कि केमिकल, दवाई के अधिक छिड़काव और जैविक कार्बन की कमी से मिट्टी में परेशानी आती है। किसानों को मिट्टी कार्ड रिपोर्ट दिया गया है।


यह हैं मानक
- मिट्टी में जिंक की मात्रा 1.2 प्रतिशत होनी चाहिए, जबकि जांच में जिंक का स्तर 0.6 से 0.8 प्रतिशत आया है, जो कम है।
- जैविक कार्बन का उच्च स्तर 0.80 प्रतिशत होना चाहिए, जो 0.20 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर तक पहुंच गया।
- फास्फोरस प्रति हेक्टेयर का उच्चस्तर 40 होना चाहिए, लेकिन जिले में 30.5 तक पहुंच गया है।
- पोटाश प्रति हेक्टेयर का उच्चस्तर 250 है, जो जिले में 90 के बीच पहुंच गया है।



जैविक कार्बन की कमी है तो गोबर और हरी खाद का प्रयोग करना चाहिए। जिन किसानों के खेतों की मिट्टी की जांच की गई है, उन्हें मृदा स्वास्थ्य कार्ड दिया जा रहा है। साथ ही खेतों की मिट्टी में जिंक, जैविक कार्बन की कमी दूर करने के लिए उर्वरक की सलाह दी जा रही है।
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- राजीव कुमार, उपकृषि निदेशक
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