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ब्रज संस्कृति के संग, मन में यमुना मुक्ति की उमंग

Mon, 16 Mar 2015 12:35 AM IST
हिमांशु त्रिपाठी
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मौसम की अदला-बदली से घिरे रविवार का दिन और समय दोपहर के 12 बजे। यमुना मुक्ति की लहरें दिल्ली की ओर बढ़ने को बेताब हैं, इंतजार है तो बस उस घड़ी का है जब ब्रज के विरक्त संत रमेश बाबा आएंगे। ठीक 12:30 बजे स्वयंसेवकों की हलचल और सीटियों की आवाज ने जाहिर कर दिया कि बाबा का आगमन हो गया है। हजार स्वर साथ बोले- ‘फिर से हरियाली छाएगी, यमुना मइया आएंगी’। बस पांच मिनट बाद ही हजारों यमुना भक्त अनाज मंडी से आगरा-दिल्ली हाईवे पर आ गए। ब्रज संस्कृति साथ है तो मथुरा के चतुर्वेदी समाज का रंग भी है। गुजरात के सैकड़ों भक्त परंपरागत परिधान में हैं। पुरबिया किसानों के हाथ में लाठी और ब्रजवासिनों कीर्तन की धुन पर सारे यात्री मगन हैं।
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संत रमेश बाबा के साथ यमुना लाने का संकल्प लेकर चले हजारों कदम साथ साथ दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं। जोश का शिखर इंद्र की बरसाती शरारत को कुछ यूं अदना साबित कर रहा है कि बूंदें गिरते ही बच्चे नाचते-गाते और तेजी से आगे बढ़ने लगे। जुबान पर ‘बच्चा-बच्चा करे पुकार, अबकी बार यमुना की धार’ के बोल हैं।

अपराह्न यात्रा में कोसी की तोता राम मंडली की महिलाएं कीर्तन कर रही हैं। तारा, इंदु तिवारी और पुष्पा गोयल के साथ सभी हरे रामा हरे कृष्णा, हरे रामा हरे हरे..गाकर नाच रही हैं। यमुना मुक्ति को भक्ति की शक्ति दे रहीं ये शक्तिस्वरूपा बारिश के बाद और उत्साह में आ गईं। उधर गुजराती टोली अपने रंग में है।
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बारिश से तरबतर गुरुकुल की बच्चियां भीगते आनंद में परंपरागत नृत्य को जी कर यमुना भक्ति का सुख ले रही हैं। जीवनदायिनी मां यमुना की मुक्ति की हर कठिनाई के पार जाने के संकल्प के साथ बढ़ती यात्रा आधे घंटे बाद महाप्रभुजी की बैठक, शीतलकुंड गेट के सामने आ गई। यहां बारिश रुकी तो हजारों लोग हाईवे पर प्रसाद ग्रहण करने बैठ गए। कुछ पल के बाद यात्रा आगे बढ़ी इंद्रदेव द्वापर को जी रहे थे और ब्रजवासियों के साथ श्रीकृष्ण थे। शीतल बयार, बारिश से घबराने की बजाय उसका आनंद लेते हुए यूपी की पुरबिया टोली एक नया गीत गाने लगी- भीजत-भीजत जाएंगे, यमुनाजी को लाएंगे...।

दोपहर के ढाई बजे हैं और पदयात्रा कोटवन सीमा पार हो रही है। यूपी पुलिस की हलचल वापस जाने की है और हरियाणा पुलिस सुरक्षा में संग संग चल रही है। गुरुकुल के बच्चों का शंखनाद, बच्चियाें का नृत्य, किसानों की हुंकार, जवानों का जोश सब बरकरार है। एक बार फिर संयुक्त नाद होता है- ‘जनम-जनम का नाता है, यमुना हमारी माता है’।
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