मथुरा। मरीजों को तत्काल उपचार देने के लिए 24 घंटे संचालित होने वाली जिला अस्पताल की इमरजेंसी खुद ही बीमार है। वार्डों से उठने वाली दुर्गंध मरीजों के साथ-साथ तीमारदारों को भी बीमार कर रही है। इतना ही नहीं मरीजों को बेड पर चादर तक नसीब नहीं हो रही है। ऐसे में मरीजों से पहले इमरजेंसी को उपचार की दरकार है।
जिला अस्पताल परिसर में ही संचालित इमरजेंसी वार्ड में प्रथम तल पर चार अलग-अलग वार्ड बने हैं। इनमें दो फीमेल वार्ड, एक मेल वार्ड और एक बच्चा वार्ड है। इनमें मरीजों को तत्काल उपचार देने के लिए भर्ती किया जाता है। हालत में सुधार होने पर मरीजों को जिला अस्पताल के सामान्य वार्डों में स्थानांतरित कर दिया जाता है लेकिन जिला अस्पताल की इमरजेंसी मरीजों को बजाए उपचार देने के लिए बीमार बना रही है। हाल यह है कि वार्डों में नियमित साफ-सफाई न होने के चलते उठने वाली दुर्गंध मरीजों और तीमारदारों को बेहाल कर रही है। नर्सिंग स्टाफ भी इन वार्डों में मुंह पर कपड़ा बांधकर जाता है।
मरीजों के लिए बेड पर जहां चादर नहीं हैं तो वहीं कूड़ेदान भी समय से खाली नहीं किए जा रहे हैं। बेड पर चादर न होने से गर्मी में रैगजीन के गद्दों पर मरीजों को परेशान होना पड़ रहा है। ये अव्यवस्थाएं इमरजेंसी में मरीजों की परेशानी बढ़ा रही हैं, लेकिन अधिकारी इससे बेखबर हैं।
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सात माह से नहीं अपडेट किया नर्सिंग स्टाफ का ड्यूटी चार्ट
इमरजेंसी वार्ड 24 घंटे संचालित है, ऐसे में यहां नर्सिंग स्टाफ की ड्यूटी प्रतिदिन आठ-आठ घंटों की तीन शिफ्टों में लगाई जाती है। इसका पूरा ब्योरा प्रतिदिन ड्यूटी चार्ट पर अंकित किया जाता है। लेकिन इमरजेंसी में लगे नर्सिंग स्टाफ ड्यूटी चार्ट को सात माह से अपडेट ही नहीं किया गया है। इस पर 31 अगस्त 2024 का ड्यूटी चार्ट आज तक अंकित है। इसके अलावा चिकित्सकों का ड्यूटी चार्ट भी 21 दिनों से अपडेट नहीं किया गया है। इस पर भी 7 अप्रैल 2025 की तारीख अंकित है।
आज तक सार्वजनिक नहीं किया मरीजों का डाटा
शासन के आदेश हैं कि इमरजेंसी में भर्ती मरीजों का प्रतिदिन का डाटा पट पर प्रदर्शित किया जाए। इसके लिए इमरजेंसी में एक पट भी बना है। इस पर तारीख, कुल बेड, भर्ती मरीज, डिस्चार्ज, रेफर और मृत्यु कॉलम बने हैं। लेकिन आज तक कभी भी मरीजों का डाटा पट पर दर्ज नहीं किया गया।
वर्जन
स्टाफ को नियमित साफ-सफाई कराने और मरीजों के बेड पर चादर उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं। अगर कहीं गड़बड़ी है तो सुपरवाइजर को निर्देशित कर उसे सुधारा जाएगा। कई बार मरीजों के कारण भी गंदगी के हालात रहते है, लेकिन इसमें सुधार किया जाएगा।
-डॉ. मुकुंद बंसल, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक