फरह (मथुरा)। हथिनी फूलकली के नए जीवन के आठ वर्ष पूरे हो गए हैं। सड़कों पर भीख मांगने के लिए काम में ली जाने वाली हथिनी के लिए वाइल्ड लाइफ एसओएस देवदूत बन कर आया। आठ साल पहले वन्यजीव संरक्षण एनजीओ वाइल्ड लाइफ एसओएस ने फूलकली को आगरा से मुक्त कराया था।
वहां वह एक मंदिर पर भीख मांगने के काम में इस्तेमाल की जा रही थी। गरम डामर की सड़कों पर घंटों चलते रहने के कारण उसके पैरों के तलवे बुरी तरह जख्मी हो गए थे। वर्ष 2012 में फूलकली को रेस्क्यू किया गया था। पहले कमजोर रही फूलकली अब सुरक्षा और अच्छी देखभाल के चलते शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ व खुश है।
अब संरक्षण गृह में विचरण करती फूलकली सबसे अलग दिखाई देती है। अपने समूह से अलग होने पर उनके मन मस्तिष्क पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। अलग-थलग रही हथिनी को हाथी संरक्षण और देखभाल केंद्र में अन्य हाथियों का साथ मिला।
वाइल्ड लाइफ एसओएस के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने कहते हैं कि कभी-कभी दर्द और अकेलेपन का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। फूलकली को यह दर्द और अकेलापन सालों तक मिला। डायरेक्टर कंजरवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी कहते हैं कि यह देख कर हमें बेहद खुशी होती है कि हमारे प्रयासों ने फूलकली के जीवन में सकारात्मक बदलाव किया है।