मथुरा। जिला अस्पताल में बुजुर्गों की परवाह के लिए भले ही स्वास्थ्य विभाग कई दावे करे लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल उलट है। करीब 10 साल पहले दस बेड का जिरियाटिक केयर वार्ड (वृद्धावस्था देखभाल वार्ड) बनाया गया था। अलग से ओपीडी चलाने का प्रचार-प्रसार किया गया, मगर वर्तमान में यहां बुजुर्गों के भर्ती होने की बात तो दूर यहां उनके लिए अलग से ओपीडी की व्यवस्था भी नहीं है।
वार्ड में वर्तमान में बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है। जिला अस्पताल में बुजुर्गों के लिए अलग से ओपीडी भी नहीं चल रही। जिरियाटिक केयर वार्ड में मनोरंजन और अध्यात्म के लिए म्यूजिक और टीवी भी लगाए जाने की योजना थी। यह व्यवस्था भी परवान नहीं चढ़ सकी है। 60 वर्ष और इससे अधिक उम्र के मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था सामान्य वार्ड में की गई है। व्यवस्था के रूप में यहां उनके बेड के कॉलिंग बेल लगाई जानी थी। इसका भी कोई अता-पता नहीं है।
एनएचएम के तहत तैयार किया गया था वार्ड
जिरियाटिक वार्ड में 60 साल से ज्यादा उम्र के मरीजों की देखभाल की जानी है। यह वार्ड राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत तैयार किया गया था। जिला अस्पताल में एनसीटी विभाग की बिल्डिंग में प्रथम तल पर इसे बनाया गया है ताकि बुजुर्ग होने के कारण उन्हें सीढ़ियां चढ़ने में दिक्कत न हो।
वार्ड बनाने में खर्च हुए थे 20 लाख
जिरियाटिक वार्ड में स्टाफ के लिए और फिजियोथैरेपी के लिए अलग से केबिन गया था। वर्तमान में वार्ड में तीन बेड ही हैं। वार्ड बनने में 20 लाख रुपये से अधिक खर्च हुए थे।
वार्ड में ये सुविधाएं होती हैं
- बुजुर्गों के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक
- बुजुर्गों के लिए फिजियोथैरेपी की सुविधा
- बुजुर्गों के लिए व्हीलचेयर, ट्रॉली, मेडिसिन कैबिनेट और अन्य जरूरी फर्नीचर
- इस वार्ड में बुज़ुर्गों को बीपी, शुगर, सांस और दिल से जुड़ी बीमारियों का इलाज मिलता है
करीब दस साल पहले जिरियाटिक वार्ड की अवधारण खत्म हो चुकी है। शासन की ओर से वार्ड संचालित होने का आदेश आएगा तो व्यवस्था की जाएगी।
- डॉ. मुकुंद बंसल, सीएमएस