मुख्यमंत्री जी यहां तो सरकारी डॉक्टर खुलेआम प्राईवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं। अपने परिवारीजनों के नाम से नर्सिंग होम खोल रखे हैं, सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को उपचार के लिए अपने प्राईवेट नर्सिंग होम में भेजा जाता है।
मथुरा में जिला और महिला अस्पताल के करीब छह चिकित्सकों के परिवारीजनों के नाम से प्राईवेट नर्सिंग होम हैं। पूरे जिले में ये संख्या 12 से अधिक है। इतना ही नहीं कई चिकित्सकों के प्राईवेट नर्सिंग होम से सेटिंग है। ऐसे में सरकारी अस्पताल में आने वाले रोगियों के उपचार की खानापूर्ति की जाती है।
जब रोग ठीक नहीं होता तो उन्हें प्राईवेट नर्सिंग होम में आने की सलाह दी जाती है। इसके लिए बाकायदा मरीज को अपने अस्पताल का पर्चा, वहां तक जाने का साधन मुहैया कराया जाता है। चिकित्सकों के इस खेल के आगे प्रशासन भी बेबस नजर आता है।
सीएमओ को शिकायत का इंतजार
सरकारी चिकित्सकों की प्राईवेट प्रैक्टिस पर शिकंजा कसने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. आरके नैय्यर ने एक दल गठित किया है, लेकिन इस दल को शिकायत का इंतजार है। सीएमओ ने बताया कि चिकित्सकों के परिवारीजनों के नाम से नर्सिंग होम तो हैं, लेकिन वो फिलहाल बंद हैं। टीम अलर्ट है यदि कोई शिकायत आती है तो हम कार्रवाई करेंगे।