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700 अरब की संपत्ति के मालिक होने का दावा

Sat, 06 Jun 2015 11:53 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा/बरसाना
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विश्व प्रसिद्ध लाड़िलीजी मंदिर और बरसाना-नंदगांव क्षेत्र में अरबों की जमीन पर मालिकाना हक का विवाद गहरा गया है। इस संपत्ति पर अपने पुरखों के नाम वसीयत होने का दावा करने वाले दिनेश कुमार दास ने मामले में मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। इधर बरसाना में गोस्वामी और दलित समाज के लोगों में तनातनी जारी है। मंदिर पर कब्जे की आशंका में लाड़िलीजी मंदिर पर पुलिस और पीएसी तैनात है। अधिकारी पल पल की सूचना ले रहे हैं। 
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थाना गोवर्धन के गांव धनिया निवासी दिनेश कुमार दास ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में बरसाना-नंदगांव और आसपास के 10 मंदिर, 6 हवेली, राधा बाग, वृषभानु कुंड, काश महल, 1400 बीघा जमीन, 42 बीघा पहाड़ और नंदगांव में 1800 बीघा जमीन का मालिक होने का दावा किया है।

इस संपत्ति का सरकारी मूल्य 700 अरब रुपये आंका गया है। दिनेश कुमार दास के अनुसार प्रदेश के विशेष कार्याधिकारी लोक शिकायत अवनीश सक्सेना ने बरसाना पुलिस को मामले में आदेश दिया था लेकिन प्रशासन ने अभी तक कब्जा दिलाने में उनकी मदद नहीं की है। उनका कहना है कि संपत्ति को लेकर रहेंगे। एसओ बरसाना का कहना है कि अभी तक इस प्रकार का कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है। मंदिर की सुरक्षा में पुलिस और पीएसी तैनात है। क्यूआरटी को वापस भेज दिया गया है।
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श्रीजी मंदिर दूसरे दिन भी रही पीएसी
दिनेश दास का कहना यह भी है कि कई राजाओं ने 1945 में बरसाना के राधारानी मंदिर के मालिकाना हक के लिए चिंरजीलाल दास के नाम वसीयत की थी। वहीं दूसरे समाज के लोगों का आरोप है कि उक्त सभी वसीयत फर्जी हैं। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को राधारानी मंदिर पर कब्जे की आशंका से पुलिस, पीएसी, क्यूआरटी और गोस्वामी समाज के लोगों ने मंदिर परिसर को चारों ओर से घेर लिया था। शनिवार शाम तक कब्जे जैसी कोई गतिविधि न होने पर क्यूआरटी को वापस भेज दिया गया। दोनों पक्ष कानूनी कार्रवाई पूरी करने में लगे हुए हैं।


यह है पूरा मामला
गोवर्धन के गांव धनिया निवासी दिनेश दास ने छाता जुडीशियल मजिस्ट्रेट के यहां वाद दायर किया। इसमें बताया कि भरतपुर के महाराज सवाई विजेंद्र सिंह, सूरजमल, ग्वालियर के महाराज टोड़ामल, जूदेव महाराज ने वसीयत, सेवायतनामा श्रीजी राधारानी मंदिर विकास ट्रस्ट बरसाना के नाम किया था। इसमें वादी के पिता स्वर्गीय चिरंजीलाल को संपत्ति का मालिक और अध्यक्ष बनाया गया। चिरंजीलाल की 1973 में नौकरी लग गई तो मूला मोदी परिवार ने फर्जी तरीके से चिरंजीलाल को मृत दिखाकर स्वयं को ट्रस्ट का अध्यक्ष घोषित करा लिया था। दिनेश का दावा है कि 23 फरवरी को अदालत ने उनके पक्ष में आदेश किया था।
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