बांकेबिहारी मंदिर के सेवायतों को नोटिस भेजने के बाद मंदिर प्रबंधन सेवायतों के जवाब का इंतजार कर रहा है। जवाब मिलने के बाद आगे कार्रवाई की तैयारी की जाएगी। इसके लिए 7 जुलाई को बांकेबिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों की बैठक बुलाई गई है।
बता दें कि 30 जून को मंदिर परिसर में प्रदेश के मुख्य सचिव आलोक रंजन और प्रशासनिक अधिकारियों को सेवायतों ने भोजन कराया था। इसके लिए देर रात तक मंदिर के द्वार खोले गए। मामले को मंदिर की परंपरा और कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताते हुए प्रबंध समिति ने सेवायत आनंद किशोर गोस्वामी और जुगल किशोर गोस्वामी को नोटिस भेजा है।
बांके बिहारी मंदिर प्रबंध कमेटी के अध्यक्ष नंद किशोर उपमन्यु ने बताया कि शनिवार की शाम तक सेवायतों की ओर से नोटिस का जवाब नहीं मिला है। सोमवार तक जवाब आने की संभावना है। इधर प्रबंध कमेटी 7 जुलाई को होने वाली बैठक को गोपनीय रखते हुए आगे की रणनीति पर कार्य कर रही है। कमेटी के अध्यक्ष नंद किशोर उपमन्यु के अस्वस्थ होने के कारण संभावना है कि बैठक इस बार मोहन बाग के स्थान पर अध्यक्ष के मथुरा स्थित निवास पर हो।
नंदकिशोर उपमन्यु का कहना है कि बैठक का स्थान सदस्यों की सुविधाओं और उनकी सलाह को देखते हुए परिवर्तित किया जाता रहा है। उन्होंने बताया कि यह कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों की बैठक है। इसमें आरोपी सेवायत आनंद किशोर गोस्वामी और जुगल किशोर गोस्वामी को नहीं बुलाया जाएगा। उनका पक्ष के लिए नोटिस के जवाब को ही आधार बनाया जाएगा।
गोस्वामी के समर्थन में भी उठी आवाज
बांकेबिहारी मंदिर में मुख्य सचिव और प्रशासनिक अधिकारियों को भोजन कराने के प्रकरण के आरोपी सेवायतों के समर्थन में भी नगरवासी और संगठन खड़े हो रहे हैं। शनिवार को नगर के कई संगठनों ने विज्ञप्ति जारी कर मंदिर में भोजन कराने को सही ठहराया है।
वृंदावन नगर सुधार समिति के अध्यक्ष आदित्य शर्मा ने कहा कि मंदिर में प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों को प्रसाद खिलाने के पीछे गोस्वामी बंधुओं का अदालत की अवमानना करने का कोई इरादा नहीं था। कुछ लोग जानबूझ कर इस मामले को तूल दे रहे हैं। पूर्व पालिकाध्यक्ष जगदीश प्रसाद शर्मा ने कहा कि मंदिर परिसर में भक्तों को प्रसाद खिलाने से मंदिर की मर्यादा भंग नहीं होती। देश के अनेक मंदिरों मे आज भी परिसर में प्रसाद खिलाया जाता है।
भाजपा बार्ड 15 के अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा और बार्ड छह अध्यक्ष प्रवीण कुमार गौतम ने कहा कि मंदिर प्रांगण में प्रसाद खिलाना मंदिर परंपरा का ही अंग है। कई मंदिरों में वर्तमान में मंदिर बंद होने के पश्चात भक्तों को प्रसाद खिलाया जाता है।
ब्रजवासी पंडा महासभा के कार्यवाहक अध्यक्ष रामनारायण ब्रजवासी ने कहा कि मंदिर में भोजन कराकर गोस्वामियों ने कोई अपराध नहीं किया। मंदिर के आंगन में भोजन खिलाने की व्यवस्था कई वर्ष से चली आ रही है।
कनकधारा फाउंडेशन की संस्थापिका डॉ. लक्ष्मी गौतम ने कहा कि ब्रज के सभी प्राचीन मंदिरों के प्रांगण में प्रसाद ग्रहण करने की परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि मैने ही कई बार राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ प्रांगण में बैठकर प्रसाद ग्रहण किया है। आज भी जब-तब शयन आरती के बाद मंदिर के अंदर भक्तों को प्रसाद ग्रहण करते देखा जा सकता है।