मथुरा। कोई कूड़े के ढेर में मिला तो किसी को अस्पताल के पास से बरामद किया गया था। यह सभी वह बच्चे हैं जिन्हें दुनिया में आने के साथ ही उनके मां-बाप ने त्याग दिया। अब प्रदेश में इस तरह से फेंके जा रहे बच्चों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ी कि सभी शिशु सदन फुल हो गए हैं। किसी में भी जगह नहीं बची है। लेकिन क्योंकि कोई दूसरी व्यवस्था नहीं है लिहाजा फिर भी जगह-जगह से आने वाले बच्चों को यहां रखा जा रहा है। प्री-मेच्योर बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है।
अगर प्रदेश की बात करें तो मथुरा, इलाहाबाद, रामपुर और लखनऊ में शिशु सदन हैं। कहीं पचास की क्षमता है तो कहीं सत्तर की। लेकिन बच्चे इतनी अधिक संख्या में बरामद हो रहे हैं कि उन्हें रखने के लिए जगह तक नहीं बची है। मथुरा के शिशु सदन में 10 बच्चों की क्षमता है जबकि 47 बच्चों को यहां रखा गया है। जबकि बच्चों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। गाजियाबाद और नोएडा से आने वाले बच्चों की संख्या सबसे ज्यादा है।
सबसे बड़ी दिक्कत उन बच्चों को लेकर आ रही है जो प्री मेच्योर हैं। उन बच्चों का लालन-पालन बड़ा मुश्किल हो रहा है। यह बच्चे अक्सर बीमार हो रहे हैं। डीजीओ अनुराग श्याम रस्तौगी ने बताया कि एक बच्चा तो सात माह है कि जो आगरा में भर्ती है। उसका वजन भी मुश्किल से 500 ग्राम है। इस बच्चे की हालत खराब बताई जा रही है।