वृंदावन। संत प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता जहां वृंदावन की आध्यात्मिक पहचान को नई ऊंचाई दे रही है, वहीं उनके नाम और पदयात्राओं से जुड़े इलाकों में जमीन का कारोबार भी तेजी से पैर पसारता नजर आ रहा है। सौभरि वन में महाराज की कुछ समय चली पदयात्रा के बाद यमुना खादर की जमीन के दाम पॉश कॉलोनियों को पीछे छोड़ गए। खादर में अवैध तरीके से खड़े हुए गेस्ट हाउस और मकानों का यह खेल खुद को शिष्य बताने वाले कुछ लोग कर रहे हैं।
खादर में नियमानुसार जमीन की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध है। बावजूद इसके स्थानीय स्तर पर प्लाॅट 30 से 50 हजार रुपये गज तक बेचे जाने जा रहे हैं। संत प्रेमानंद महाराज ने श्रीकृष्ण शरण सोसाइटी से श्रीराधेहित केलिकुंज आश्रम तक तड़के पदयात्रा शुरू की थी। उनके दर्शन के लिए रातभर सड़क पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। इससे दुकानों, ढाबों और अन्य छोटे कारोबारियों को भी रोजगार मिला।
स्वास्थ्य कारणों के चलते आश्रम की ओर से सोशल मीडिया पर पदयात्रा अनिश्चितकाल के लिए बंद किए जाने की सूचना दी गई। इसके बाद महाराज केलिकुंज में रहने लगे और फिर कुछ समय के लिए सौभरि वन में पदयात्रा शुरू हुई। इसी दौरान सौभरि वन के खादर में जमीन का कारोबार तेजी से बढ़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यमुना से करीब दो किलोमीटर दूर जमीन 30 हजार रुपये गज और गोशाला के पास 50 हजार रुपये गज तक बेची जाती है।
खादर की रजिस्ट्री भी हो रही, बिजली कनेक्शन भी मिल रहे
खादर में बैनामे होने और बिजली कनेक्शन मिलने की बात स्थानीय लोगों ने बताई। दिल्ली, हरियाणा और गुरुग्राम से आए कई लोगों ने यहां प्लॉट लेने की जानकारी दी। वहीं, नियमानुसार खादर में बैनामे और बिजली का कनेक्शन होने पर प्रतिबंध है।
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यमुना विहार कुंज में बनाया नया आश्रम
महाराज ने सौभरि वन जाना बंद करने के बाद मांठ के बेलवन में यमुना किनारे यमुना विहार कुंज में नया आश्रम बनाया। यहां एकांत साधना के चलते कुछ समय मुलाकात और एकांतिक वार्तालाप बंद रहे। अब दीक्षित परिकरों और विशेष लोगों को प्रवचन में प्रवेश दिया जा रहा है। आश्रम से करीब दो किलोमीटर पहले बूथ बनाया गया है, जहां शिष्य लोगों की जांच के बाद प्रवेश देते हैं। खेत वाले और टोकन लेकर आने वाले लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति मिल रही है।
खादर में निर्माण हो रहा है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
- आशीष सिंह, सचिव मथुरा विकास प्राधिकरण