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... तो मथुरा में नहीं कोई धनगर

Wed, 30 Mar 2016 12:18 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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मीटिंग
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वर्ष 1891 की जनगणना के दौरान जिले में धनगर जाति की संख्या 11726 थी जो अब बढ़कर 1.30 लाख के करीब होनी चाहिए, लेकिन 2011 की जनगणना में इनकी संख्या शून्य दिखाई गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के साथ शासन के साफ आदेश के बावजूद जिले में धनगर जाति के प्रमाणपत्र भी तहसीलों से जारी नहीं किए जा रहे हैं।
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मंगलवार को एडीएम कानून व्यवस्था सुरेंद्र शर्मा की अध्यक्षता में डीएम द्वारा गठित प्रशासनिक कमेटी के समक्ष धनगर समाज के लोगों ने कई साक्ष्य रखे। धनगर समाज का नेतृत्व करते हुए डा. यशपाल बघेल ने एससी-एसटी आयोग की उस रिपोर्ट को भी रखा जिसमें धनगर को गड़रिया की उपजाति माना है।

इसके लिए शोध अधिकारी तरुण खन्ना की सर्वे रिपोर्ट भी प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि गड़रिया की उपजाति धनगर मथुरा के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में निवास करती है। इन आदेशों के क्रम में इसके प्रमाणपत्र अन्य जिलों में जारी किए जा रहे हैं, लेकिन मथुरा में प्रमाणपत्र नहीं बनाए जा रहे हैं।
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इन साक्ष्यों के आधार पर विचारोपरांत फैसला लेने के लिए कमेटी ने एक बार फिर 10 दिन बैठक करने का निर्णय लिया। इस दौरान प्रशासनिक कमेटी में समाज कल्याण अधिकारी डा. उमाशकर शर्मा, डिप्टी कलक्टर अंजनी कुमार सहित धनगर समाज से जिलाध्यक्ष हरिओम धनगर, प्रदेश उपाध्यक्ष आनंद धनगर, सोनवीर, भूपसिंह बघेल शामिल रहे।

इनके अलावा धनगर समाज से सहाब सिंह धनगर, देवीसिंह धनगर, महेश धनगर, इंजीनियर खजान सिंह, मुकेश धनगर, रूपेश धनगर, राजकुमार, तुलसीराम धनगर आदि मौजूद रहे।
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