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Mathura News: लाडली के जन्म की बधाई लेकर श्रीजी की अटारी पहुंची ढांढन

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बरसाना। सिर पर घूंघट, सोलह शृंगार और होंठों पर लाडली के जन्म की बधाई... ढांढन के श्रीजी की अटारी पर पहुंचते ही बरसाने की पुरानी परंपरा फिर जीवंत हो उठी। कस्बे की परिक्रमा के बाद श्रीजी के दरबार में चाव चढ़ाया गया तो बधाई के पदों से मंदिर परिसर गूंज उठा।
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ढांढन लीला में बरसाने की उस विरासत के दर्शन हुए, जिसे अनुराग सखी बाबा ने दशकों तक अपने गायन से जीवित रखा और अब उसी परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। वंशावली के पदों और बधाई के स्वरों के बीच श्रद्धालु लाडली जी के जन्मोत्सव के उल्लास में डूबे रहे। कस्बे की परिक्रमा के बाद परिकर श्रीजी के दरबार पहुंचा। यहां लाडली जी को चाव चढ़ाने के बाद बधाई गायन हुआ। वरुण तोमर ने बधाई के पद सुनाए, जबकि वंशावली के पदों का गायन किया गया। मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु बधाई के स्वरों के साथ भक्ति भाव में डूबे रहे। लीला के समापन पर सेवायत भगवानदास गोस्वामी ने परंपरा के अनुसार ढांढन को वस्त्र और ओढ़नी भेंट की। बधाई के स्वरों के बीच श्रीजी की अटारी देर तक लाडली जी के जन्मोत्सव की खुशी से सराबोर रही।

चार दशक तक अनुराग सखी ने निभाई परंपरा

बरसाने की बधाई परंपरा को अनुराग सखी बाबा ने करीब चार दशक तक अपने गायन से जीवंत रखा। श्रीजी और ललिता जी के प्राकट्य उत्सवों में उनकी बधाई गायन की परंपरा विशेष पहचान बनी। उनके बाद यह विरासत आगे बढ़ी और ढांढन लीला आज भी बरसाने की प्राचीन भक्ति और लोक परंपरा का जीवंत स्वरूप बनी हुई है।
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