मोर कुटी पर मयूर लीला में मयूर बने श्रीकृष्ण का स्वरूप
बरसाना। कस्बे में सोमवार को बूढ़ी लीलाओं का शुभारंभ ब्रह्मांचल पर्वत और अष्टसखी गांवों से हुआ। इन लीलाओं के मंचन ने ऐसा आभास कराया मानो ब्रजभूमि द्वापर युग में प्रवेश कर गई हो। श्रद्धालु राधाकृष्ण की अनूठी प्रेम परंपराओं के साक्षी बने। मोरकुटी में मयूर लीला का मनोहारी आयोजन किया गया। इसे देख श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
मान्यता है कि जब श्रीराधा मोरों को दाना चुगा रही थीं तब श्रीकृष्ण उनसे मिलने मयूर का रूप रखकर वहां आ पहुंचे। वे बार-बार राधा के समीप जाकर नृत्य करने लगे। राधा जब लड्डू खिलातीं तो ग्रहण कर लेते लेकिन सखियों से कुछ भी न लेते। अंततः राधाजी ने उन्हें पहचान लिया। सखियों के आग्रह पर श्रीकृष्ण ने मयूर रूप में राधाजी को रिझाने के लिए अद्भुत नृत्य किया तभी से यह स्थान मोरकुटी के नाम से प्रसिद्ध है। यहां मयूर भगवान के चित्रपट व सालिग्राम का पूजन किया जाता है। संवाद