विहाबला लीला में ग्रामीण कन्यादान करते हुए।
बरसाना (मथुरा)। बूढ़ी लीला महोत्सव के तहत बृहस्पतिवार को ऊंचागांव स्थित दाऊजी मंदिर परिसर में श्याम सगाई और विहाबला लीला का आयोजन किया गया। विरजन स्वामी, चिकसौली वालों की रास मंडली द्वारा प्रस्तुत मंचन ने श्रद्धालुओं को भक्ति में डुबो दिया।
लीला मंचन में माता यशोदा द्वारा राधारानी को बहू के रूप में स्वीकारने का प्रसंग आकर्षण का केंद्र रहा। गोपियों ने मंगल गीत गाकर वातावरण को रसपूर्ण बना दिया। सखियों द्वारा विवाह संस्कार के मंत्रों का अभिनय कर राधा श्याम के दिव्य मिलन का चित्रण किया। आयोजन के दौरान श्रद्धालु आराध्य की जय-जयकार करते रहे। संवाद
सांकरी खोर में आज होगी दानलीला
नंदगांव। श्रीकृष्ण की लीलाओं में दानलीला का विशेष महत्व है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण ने ग्वालवालों संग बरसाना और चिकसौली के बीच संकरी गली सांकरी खोर में गोपियों से दूध-दही का दान मांगा था। गोपियों के आनाकानी पर हुई छीना-झपटी में मटकी टूट गई और दूध-दही जमीन पर बिखर गया। यही प्रसंग आज भी जीवंत होकर श्रद्धालुओं को रसस्नान कराता है।
राधाष्टमी के पांच दिन बाद भादों शुक्ल एकादशी को यहां दानलीला का आयोजन किया जाता है। शुक्रवार को बरसाना और चिकसौली के बीच स्थित सांकरी खोर में यह लीला होगी। इसे बूढ़ी लीला के नाम से भी जाना जाता है। लोकेश गोस्वामी ने बताया यह लीला आस्था का प्रतीक है। नंदगांव से श्रीकृष्ण और ग्वालों की झांकी पहुंचती है तो बरसाना से राधारानी और चिकसौली से चित्रासखी की। गोपियों और ग्वालों के बीच परंपरागत दान-लीला का मंचन होता है। श्रद्धालु मटकी का प्रसाद पाने के लिए होड़ लगाते हैं।
जल विहार लीला के दर्शन से आलोकित हुई पीली पोखर
नंदगांव। बूढ़ी लीला महोत्सव में बृहस्पतिवार को पीली पोखर पर जल विहार लीला का आयोजन किया गया। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ तालाब के तट पर उमड़ पड़ी। सभी ने राधा-कृष्ण के दिव्य नौका विहार दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया। नौका पर विराजमान राधा-कृष्ण की झलक पाते ही भक्त जय-जयकार कर उठे। कलाकारों द्वारा मंचित जल क्रीड़ा के प्रसंगों ने वातावरण को रसपूर्ण बना दिया। संवाद