मथुरा। पूस का माह शुरू होने से पहले ही सर्दी धीरे-धीरे बढ़ रही है। हल्की-हल्की बयार रात में ठिठुरन बढ़ा रही है, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों को अभी सर्दी का अहसास नहीं हो रहा है। सिर्फ कागजों में स्मार्ट रैन बसेरे बनाए गए हैं, जबकि जमीन पर कार्य शून्य है। बाहर से आने वाले श्रद्धालु इधर-उधर रात बिता रहे हैं। यही हाल जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों का है।
नगर निगम ने कागजों में मथुरा-वृंदावन में कुल 13 रैन बसेरों की व्यवस्था की है। इसमें तीन स्थायी और 10 अस्थायी रैन बसेरे शामिल हैं। स्थायी रैन बसेरे नगला कोलू, बंगाली घाट और भूतेश्वर रेलवे स्टेशन पर बनाए गए हैं। वहीं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अस्थायी रैन बसेरों की व्यवस्था है। पड़ताल में अधिकारियों की व्यवस्थाओं की हकीकत सामने आई है। अभी तक एक भी अस्थायी रैन बसेरों का इंतजाम नहीं किया गया है। बाहर से आने वाले तीर्थयात्री पेट्रोल पंप, बस स्टैंड, तीर्थ स्थानों के बाहर रात बिताने को मजबूर हैं।
शिकोहाबाद से परिवार के साथ दर्शन करने आए ब्रजमोहन जन्मभूमि के निकट रात 11 बजे पेट्रोल पंप पर सोते मिले। उनका कहना है कि जन्मभूमि के पट बंद होने से दर्शन नहीं हो सके। इसलिए उन्होंने रात बिताने के लिए पेट्रोल पंप का सहारा लिया है। मैनपुरी से आए जगवीर का भी यही हाल था। जन्मभूमि के पट बंद होने बाद उन्होंने रात बिताने के लिए एटीएम का सहारा लिया। इसी तरह कई श्रद्धालु सार्वजनिक स्थानों पर खुले आसमान के नीचे रात बिताने को मजबूर दिखे, लेकिन निगम के इंतजाम सिर्फ कागजों में दौड़ रहे हैं। श्रद्धालु व असहायों की जिंदगी दांव पर है, लेकिन जिम्मेदारों की नींद नहीं टूट रही है।
जिला अस्पताल में तीमारदार भी हो रहे परेशान
जिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के तीमारदारों का भी बुरा हाल है। गांव देहात से आए तीमारदारों ने बताया कि मरीज को भर्ती कराने के बाद उनके पास न पैसा होता है, न ठहरने की जगह। रात में वह सार्वजनिक स्थानों पर ही रातें बिता रहे हैं।
अस्थायी रैन बसेरों को जल्द ही स्थापित कराया जाएगा। स्थानों को चिन्हित कर लिया गया है। वहीं स्थायी रैन बसेरों को भी दुरुस्त कराया जाएगा, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।
संजय चौहान, मुख्य अभियंता