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Mathura News: 76 सालों में पहली बार कम आए श्रद्धालु, बांकेबिहारी को जी भर के निहारा

Sun, 20 Aug 2023 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
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व़ृंदावन (मथुरा)। हरियाली तीज पर लाखों श्रद्धालु आते थे, लेकिन शनिवार को ऐसा माहौल नहीं था। बांके बिहारी मंदिर के अंदर कुछ भीड़ देखी गई, लेकिन माहौल आम दिनों से काफी अलग था।
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श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य के सहज दर्शन किए और उन्हें जी भरकर निहारा। मंदिर के बाहर गलियों में भी हर दिन शनिवार को दिखने वाले दृश्य नहीं थे। प्रशासन को उम्मीद भी नहीं थी कि ऐसा होने वाला है। इसी के चलते 2000 से अधिक पुलिसकर्मी और पीएसी की 3 कंपनियां लगाईं गईं। इनके अलावा व्यवस्थाओं पर निगरानी के लिए 12 सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात कर अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गईं ताकि श्रद्धालुओं को कोई दिक्कत नहीं हो। लेकिन आलम यह रहा कि सुबह और शाम को श्रद्धालुओं ने आसानी से बांकेबिहारी के दर्शन किए।
कम भीड़ देखकर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत गोस्वामी और व्यापारी भी हैरान हैं। बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत अशोक गोस्वामी ने बताया कि वर्ष 1947 के बाद पहली बार ऐसा देखने को मिला है कि हरियाली तीज पर श्रद्धालु सामान्य दिनों से भी कम आए। पहली बार 19 अगस्त 1947 में हरियाली तीज पर स्वर्ण हिंडोला में ठाकुरजी विराजमान हुए थे।
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इसके बाद से हर हरियाली तीज पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते रहे हैं। प्रशासन को भी इसका अंदाजा था। इसी वजह से चाक चौबंद व्यवस्थाएं की गईं। मंदिर सेवायत गोपी गोस्वामी ने बताया कि हरियाली तीज पर श्रद्धालुओं की कम संख्या के पीछे अधिक मास और पिछले दिनों हरियाणा में सांप्रदायिक घटना भी एक बड़ा कारण हो सकता है क्यों कि बड़ी संख्या में हरियाणा से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे, जो कि इस बार नहीं आए हैं।
व्यापारी नेता अखिल अग्रवाल ने वर्ष के बड़े पर्व पर श्रद्धालुओं की कम संख्या का कारण तीन वर्ष के अंतराल से आने वाले अधिक मास को बताया। उन्होंने कहा कि अधिक मास में लाखों श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा जो व्यवस्थाएं की गई हैं, उनको देखते हुए श्रद्धालु कम आए, क्यों कि श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है, लेकिन लंबे समय के बाद भीड़ कम आने पर स्थानीय लोगों को भी बांकेबिहारी के दर्शन करने का अवसर मिला। बांकेबिहारी मंदिर के सह प्रबंधक उमेश सारस्वत ने कहा कि हरियाली तीज पर लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे, लेकिन इस बार यह संख्या बहुत कम रही। श्रद्धालुओं के कम आने के पीछे 15 अगस्त को दुसायत मोहल्ल में हुआ हादसा, बीते दिनों पूरा हुआ अधिक मास और पुलिस प्रशासन द्वारा की गई चाक चौबंद व्यवस्थाएं भी कारण हो सकती हैं।
भीड़ कम आने के कारण
1. अधिक मास: अधिक मास होने के कारण इस बार लाखों श्रद्धालु पहले ही बांकेबिहारी के दर्शन कर लौट चुके हैं। बीती 16 अगस्त को ही अधिक मास पूरा हुआ है। अंतिम चार दिन में करीब 55 लाख श्रद्धालु बांकेबिहारी और राधारानी के दर्शन कर लौटे हैं। ऐसे में आसपास के राज्यों से श्रद्धालुओं का आगमन कम रहा।
2. लगातार छुट्टियां: रविवार से मंगलवार तक लगातार तीन छुट्टियां होन के कारण एनसीआर के अधिकतर श्रद्धालु बांकेबिहारी और अन्य मंदिरों के दर्शन कर जा चुके थे। ऐसे में चार दिन बाद फिर यहां आने का रुख नहीं किया।
3. हादसे में पांच लोगों की मौत: हरियाली तीज पर अधिक श्रद्धालुओं के न आने के पीछे सबसे बड़ा कारण 15 अगस्त की शाम छज्जा गिरने पांच लोगों की मौत भी रहा। यह हादसा देशभर में चर्चित रहा। दरअसल मंदिर के आसपास की गलियां तंग और इनमें कई जर्जर मकान भी हैं। बारिश का मौसम भी चल रहा है। ऐसे में लोगों ने हादसे की आशंका के चलते भी अभी वृंदावन आने से परहेज किया।
4. पुलिस-प्रशासन की पुख्ता व्यवस्था: हादसे के बाद से पुलिस-प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट था। भीड़ और जाम नियंत्रण में फेल होने की किरकिरी से बचने के लिए वृंदावन और बरसाना में व्यापक इंतजाम किए। जगह-जगह बैरिकेडिंग, पार्किंग स्थल, रूट डायवर्जन के कारण भीड़ का दबाव नहीं बन पाया और सभी लोग सुगमता से आवागमन कर सके। यही व्यवस्था मंदिर में दर्शन के दौरान कारगर रही। भीड़ नियंत्रण के लिए मंदिर प्रबंधन ने भी 60 अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड लगाए।
5. मंदिर प्रबंधन की एडवाइजरी: मंदिर प्रबंधन ने बच्चों, बुजुर्गो, दिव्यांगों और मरीजों को हरियाली तीज पर वृंदावन नहीं लाने की अपील की थी। इसका भी असर रहा कि आसपास के जिलों से कम लोग वृंदावन पुहंचे।
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