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पोस्टमार्टम हाउस पर पता चला शव परिजन का नहीं

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मथुरा। जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा शव पोस्टमार्टम के लिए लाने पर पता चला कि यह शव तो अपने परिजन का नहीं है। इससे नाराज परिजन ने हंगामा किया। बाद में जीआरपी सिपाहियों ने अपनी गलती समझते ही शव को वापस कर दिया।
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आरपीएफ को जंक्शन पर 30 अक्तूबर को एक वद्ध बीमार हाल में मिला। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। अस्पताल में २ नवंबर को वृद्ध की मौत हो गई। परिजन के इंतजार में अस्पताल के कर्मचारियों ने शव को मोर्चरी में रखवा दिया। इसी दौरान कोतवाली पुलिस ने भी एक अन्य अज्ञात शव को मोर्चरी में रखवा दिया। जिसकी पहचान भी हो गई। परिजन शव की पहचान कर पोस्टमार्टम न कराने के उद्देश्य से कोतवाली चले गए। इसी बीच जीआरपी के सिपाही भी आए और शव को पोस्टमार्टम कराने के उद्देश्य से पोस्टमार्टम हाउस ले गए। पोस्टमार्टम पर जाकर जब परिजन ने शव को देखा तो वह चौंक गए। कहा, शव उनके परिजन का नहीं है। इससे जीआरपी के सिपाहियों के भी पैरों तले जमीन खिसक गई। वह शव को लेकर तुरंत ही जिला अस्पताल की मोर्चरी गए। वहां रखा हुआ दूसरा शव उस वृद्ध का था, जिसको उन्होंने भर्ती कराया था। उन्होंने शव को परिजन को पोस्टमार्टम के बाद सौंप दिया। जीआरपी थाने के इंस्पेक्टर क्राइम जितेन्द्र सिंह ने बताया कि जिला अस्पताल की मोर्चरी में दो शव रखे थे। इनमें एक शव कोतवाली पुलिस द्वारा रखवाया गया था। थाने के सिपाही भूलवश दूसरे शव को पोस्टमार्टम गृह ले गए थे। गलती का अहसास होने पर सिपाहियों ने शव परिजन को सौंप दिया। संवाद
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