मथुरा। शेरगढ़ के गांव जंघावली और विशंभरा सहित चार गांवों में साइबर ठगों के ठिकानों पर की गई पुलिस कार्रवाई के बाद गांवों के ज्यादातर युवक भाग निकले हैं। दोनों गांवों से धरपकड़ के बाद इलाके के सैकड़ों मोबाइल भी बंद हो गए हैं। अब पुलिस टावर एनालिसिस के आधार पर कार्रवाई करेगी।
साइबर ठगी की बढ़ती घटनाओं के कारण मिनी जामताड़ा में बदल चुके शेरगढ़ के गांव विशंभरा और जंघावली, बाबूगढ़ और नगला बौना में पुलिस ने रविवार को कई थानों के फोर्स के साथ धरपकड़ की थी। पुलिस ने घरों और खेतों से 50 से ज्यादा संदिग्धों को पकड़ा था। इनमें से 34 के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस की सख्त कार्रवाई के बाद दोनों गांवों में सोमवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। ज्यादातर लोग इस मामले में कुछ भी बताने में गुरेज कर रहे हैं।
पुलिस ने बताया कि दबिश के दौरान ही तकरीबन 150 लोग भाग निकले थे। जो लोग साइबर ठगी में संलिप्त थे, लेकिन पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाए। वह भी अपने घरों से भाग निकले हैं। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के बाद पुलिस के सर्विलांस पर मौजूद अन्य मोबाइल भी बंद हो गए हैं। ऐसे में इलाके के मोबाइल टावर के एनालिसिस के बाद साफ हो सकेगा कि घटना के बाद कितने लोगों ने घर छोड़ा। इन्हें चिह्नित करने के बाद पुलिस कार्रवाई करेगी। एसपीआरए सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि रेड जोन के गांवोें में कार्रवाई जारी रहेगी।
घर-घर सत्यापन अभियान चलाएगी पुलिस
पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद साइबर ठगों की कमाई का पता लगाने के लिए घर-घर सत्यापन अभियान चलाएगी। सत्यापन में दोनों गांवों में लोगों की आजीविका के साधन, कितने लोग बेरोजगार हैं और कितने कामगार हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ कितने लोग उठा रहे हैं। कितने लोग ऐसे हैं, जो एक-दो साल में मकान, गाड़ी सहित सहित अन्य चीजें खरीद चुके हैं।