पंडित दीनदयाल उपाध्याय मेला जन्मोत्सव की शाम भारतीय संस्कृति के अथाह सागर में डूबी रही। ब्रज की होली पर फूल बरसे, माहौल मदमस्त हो गया। महारास पर दर्शक सुधबुध खो कर एक टक निहारते रहे, वहीं थाली में दीपक नृत्य पर तालियों की गड़गड़ाहट से वातावरण गूंज उठा।
संस्कार भारती के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान संस्कार, संस्कृति और श्रद्धा की ऐसी त्रिवेणी बहाई कि दर्शक झूमने को मजबूर हो गए। शुभारंभ डॉ. रोशनलाल, मेला महामंत्री अशोक कुमार टैैंटीवाल, भानु महाजन और स्मारक निदेशक पदम और प्रकल्प प्रमुख महेश ने दीनदयाल के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की। संचालन जितेंद्र विमल, अध्यक्षता भानु महाजन ने की।
संघ प्रचारकों का रहा बसेरा
दीनदयाल धाम। एकात्ममानववाद की धरा पर विक्रमी तिथि से मनाए जाने वाला मेला जन्मोत्सव राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारकों से गुलजार रहा। प्रांत प्रचारक से लेकर कई नगरों और महानगरों के प्रचारक, सह प्रचारक मेले का आनंद उठाते रहे। इस दौरान तमाम पुराने प्रचारकों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्म शताब्दी वर्ष पर भी मंथन किया।
लोकगीतों की मस्ती पर झूमे, तो विरह पर तड़पे
महिलाओं के कार्यक्रम को दीनदयाल धाम में सांसद बनवाएंगी सभागार
दीनदयाल धाम। दीनदयाल उपाध्याय मेला जन्मोत्सव के आखिरी दिन लोकगीतों की मस्ती छाई रही। बालिकाओं और महिलाओं के दलों ने अपनी गायकी और ढोलक की थाप पर हुनर दिखाया। लोकगीत कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि सांसद हेमामालिनी, आगरा की पूर्व मेयर बेबी रानी मौर्य और अंजुला माहौर ने दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया। चिड़िया चटाचट बोले बधायो मेरे अंगना में डोले पर श्रोता झूम उठे। तो चुटीला काली रेशम कौ, मेरी कमर पयौ लहराय गीत सुनाया। भारती, सुधा, पूजा, अन्नू, रीता आहूजा के साथ अंजुला माहौर ने भी लोकगीत गाए। संचालन रीना सिंह ने किया। निर्याणक की भूमिका कमलेश चौहान, सीमा सारस्वत, अंजू मिश्रा, रूबी शाक्य, मिथलेश पवार, विलकेश, पायल चौहान, अनीता दुबे, शारदा चौहान, प्रवीना, गायत्री आदि ने निभाई।