वृंदावन (मथुरा)। भारतरत्न महामना पं. मदनमोहन मालवीय की जयंती की पूर्व संध्या पर ब्राह्मण महासभा ने गोविंद घेरा स्थित कैम्प कार्यालय पर कार्यक्रम का आयोजन किया। विप्र समाज ने मालवीय जी के चित्रपट पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्चन कर उन्हें याद किया।
कार्यक्रम में ब्राह्मण महासभा के संरक्षक पं.सुरेश चंद्र शर्मा व अध्यक्ष महेश भारद्वाज ने कहा कि महामना मदनमोहन मालवीय अपने युग में स्वतंत्रता आंदोलन के प्रधान नेताओं में थे। हिंदुत्व उनके लिए एक धर्म नहीं वरन संस्कृति थी। वेशभूषा और आचार-विचार में मालवीय जी भारतीय संस्कृति के प्रतीक थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डाकपाल पवन गौतम एवं वंशी तिवारी ने कहा कि मालवीय जी को ही इस बात का श्रेय जाता है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश की अदालतों और दफ्तरों में हिन्दी को व्यवहार योग्य भाषा के रूप में स्वीकृत कराया। इससे पहले केवल उर्दू ही सरकारी दफ़्तरों और अदालतों की भाषा थी।
कृष्णचन्द्र गौतम (छीता गुरु) एवं गोपाल शरण शर्मा ने कहा कि काशी हिन्दू विश्वविद्यालय जैसी अनेक संस्थाओं के जनक एवं सफल संचालक के रूप में हिन्दी के उत्थान में तो मालवीय जी की भूमिका ऐतिहासिक है। मालवीय जी ने काशी नागरी प्रचारिणी सभा की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अभूतपूर्व व्यक्तित्व व कृतित्व के कारण ही रवीन्द्रनाथ ठाकुर और महात्मा गांधी ने उन्हें ‘महामना’ की उपाधि प्रदान की। इस अवसर पर रामनारायण ब्रजवासी, मुरारी थोकदार, वंशी शुक्ला, पंकज शर्मा, नन्नी गौड़, गोविंद पचौरी, कृष्णगोपाल शर्मा, गोविंद बौहरे, सुरेश शुक्ला, मोहनलाल शर्मा, धीरज शर्मा, सोनू पाठक, दीपक शर्मा, अतुल गोस्वामी आदि उपस्थित थे।