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सती के श्राप से सुरीर में नहीं रहता कोई करवाचौथ का व्रत

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सुरीर में सती माता का मंदिर। - फोटो : MATHURA
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टैंटीगांव (मथुरा)। देश-विदेश में हिंदू महिलाएं अपने पतियों की दीर्घायु के लिए करवाचौथ (चार नवंबर) पर व्रत रखेंगी। इस व्रत को लेकर नवविवाहिताओं में खासा उत्साह है। बाजार की करवाचौथ को लेकर रौनक बढ़ गई है। गांव-गांव फेरुआ शृंगार का सामान बेचते फिर रहे हैं। इसके विपरीत मांट तहसील के कस्बा सुरीर में इस त्योहार को लेकर कोई रौनक नहीं है। जी हां, यहां महिलाएं सती के श्राप के चलते करवाचौथ का व्रत नहीं रखती हैं।
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सुरीर के मोहल्ला बघा में 200 वर्ष पूर्व से ही करवाचौथ का व्रत नहीं रखा जाता है। 97 वर्षीय सुनहरी देवी ने बताया कि इसके पीछे एक कहानी है। 200 वर्ष पूर्व की बात है। थाना नौहझील के गांव रामनगला का एक युवक ससुराल से अपनी पत्नी को विदा कराकर सुरीर के बघा मोहल्ले में होकर भैंसा गाड़ी से गांव लौट रहा था। इस मोहल्ले के लोगों ने भैंसा गाड़ी रोक ली और गाड़ी में जुते भैंसे को अपना बताते हुए झगड़ा करने लगे। इसी झगड़े में सुरीर के लोगों ने युवक की हत्या कर दी। अपने सामने पति की मौत से कुपित होकर नवविवाहिता ने मोहल्ले के लोगों को श्राप देते हुए कहा कि जिस प्रकार में बिलख रही हूं। तुम्हारी महिलाएं भी बिलखेंगी।
श्राप देते हुए वह पति के साथ सती हो गई। इस घटना के बाद मोहल्ले में अनहोनी शुरू हो गई। इसे सती का श्राप कहें या बिलखती पत्नी के कोप का कहर, यहां कई नवविवाहिताएं विधवा हो गईं। इसे देख बुजुर्गों ने इसे सती का श्राप मान लिया और गलती के लिए क्षमा मांगी। तभी से इस मोहल्ले में कोई भी महिला करवाचौथ व अहोई अष्टमी का व्रत नहीं रखती। इस दिन महिलाएं पूरा शृंगार भी नहीं करती हैं।
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नवविवाहिता हुईं मायूस
राधा देवी व्रत रखना चाहती थी, लेकिन ससुरालीजनों ने मोहल्ले की परंपरा के बारे में बताया तो वह मायूस हो गईं। सीमा देवी की भी पहली करवाचौथ है। सती के श्राप के बारे में सुना तो व्रत का ख्याल ही काफूर हो गया। पूनम देवी का कहना है कि उसका पहला व्रत है। लेकिन बंदिशों के कारण व्रत नहीं रख पाएंगी। नवविवाहिता रुक्मिणी देवी का कहना है कि शादी के बाद पहले करवाचौथ पर पति की दीर्घायु के लिए व्रत रखने की मन में बहुत इच्छा थी। प्रेमवती, रामवती, बबिता देवी, जयंती देवी आदि का कहना है कि गांव में स्थित सती माता के मंदिर में सभी पूजा-अर्चना करते हैं। शुभ कार्य करने से पहले सभी माता को शीश झुकाते हैं। सभी महिलाएं पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सलामती मांगती हैं।
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