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केरोसिन उड़ेल निकाल ली माचिस, मचा हल्ला

Tue, 28 Jun 2016 12:00 AM IST
अमर उजाला मथुरा
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डीएम आफिस में की सुइसाइड की कोशिश - फोटो : अमर उजाला
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कलक्ट्रेट में सोमवार दोपहर पहुंची एक महिला ने डीएम के चेंबर में अपने दो बेटों के साथ केरोसिन ऊपर उड़ेल कर माचिस निकाल ली। यह देख वहां अफरातफरी मच गई। पुलिस ने तीनों को आननफानन में पकड़कर उनसे माचिस छीनी और अस्पताल भिजवा दिया। महिला अपने पति को शहीद बताते हुए उनका स्मारक और प्रतिमा लगवाने की मांग कर रही है। उनका पति आईटीबीपी में जवान था, 2014 में उसकी मौत हो गई थी।
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गोवर्धन तहसील के गांव मकेहरा निवासी विमला अपने बेटों रमेश और दीपक के साथ दोपहर को करीब 12 बजे कलक्ट्रेट पहुंचीं उस वक्त डीएम निखिल चंद्र शुक्ला वहां नहीं थे। डीएम के चेंबर में महिला और उसके दोनों बेटों ने अपने ऊपर केरोसिन उड़ेलकर जैसे ही माचिस निकालकर जलाने की कोशिश की, वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों और फरियादियों ने उन्हें पकड़ लिया। तत्काल तीनों को जिला अस्पताल भेज दिया गया। 

बताया जाता है कि महिला का पति सुग्रीव सिंह आईटीबीपी में जवान था। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में 22 नवंबर 2014 को उसकी मौत हो गई थी। विमला का कहना है कि माओवादियों से लड़ते हुए उसके पति शहीद हुए थे। वह तभी से गांव में उनका स्मारक और प्रतिमा लगवाने की मांग कर रही हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही।
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सुग्रीव सिंह के शहीद होने की हमारे पास कोई जानकारी नहीं है। आईटीबीपी की रिपोर्ट के अनुसार मौत के दौरान वह अपने कैंप से गायब थे। उनके नाम विवाद के बारे में संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज है। माना जा रहा है कि उनकी मौत इसी विवाद में हुई है, लेकिन फिर भी परिवार वालों की तसल्ली के लिए दोबारा से पूरी रिपोर्ट मंगवाई जा रही है।
- निखिल चंद्र शुक्ला, जिलाधिकारी मथुरा

 
मेरे पति शहीद हुए हैं, हक लेकर रहूंगी: विमला
विमला देवी का कहना है कि उनके पति सुग्रीव सिंह शहीद हुए हैं। शिवपुरी जिले में माओवादियों से लड़ते वक्त उनकी मौत हुई थी। सैनिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया था। अब प्रशासन झूठ बोल रहा है, लेकिन वह और उनका परिवार हक के लिए लड़ाई लड़ता रहेगा। जरूरत पड़ी तो वह लोग दिल्ली से लेकर लखनऊ तक जाएंगे।

दो साल से भटक रहे हैं हम
सुग्रीव सिंह के बेटे रमेश और दीपक का कहना है कि वह दो साल से भटक रहे हैं। कभी कभी तहसीलदार से गुहार लगाते हैं तो कभी डीएम से। उन लोगों ने गांव में खुद भी स्मारक बनाने के लिए ईंटें मंगवाई थीं। तिरंगा लगाया गया था, लेकिन गांव के कुछ लोग उठाकर ले गए। इसकी शिकायत एसएसपी से भी की, लेकिन किसी ने नहीं सुना।
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