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संकल्प-नरेश नंदिनी आनंद आत्महत्या प्रकरण का एक साल

Thu, 15 Oct 2015 11:19 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथ्ाुरा
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कोसीकलां में दिल्ली-मथुरा रेल लाइन पर संकल्प आनंद और उनकी पत्नी नरेश नंदिनी की आत्महत्या की घटना को एक साल बीत चुका है। इस बहुचर्चित प्रकरण ने दिल्ली के एलएनजेपी फोरेंसिक रिसर्च इंस्टीट्यूट में करोड़ों के घोटाले का खुलासा किया था।
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संकल्प और उनकी पत्नी 10पेज के सुइसाइड नोट में आत्महत्या कारण और उसके कारकों का जिक्र कर गए थे लेकिन आरोपियों की फेहरिस्त और उनके औहदे इतने बड़े हैं कि आज तक मामले की विवेचना ही पूरी नहीं हो पाई है। सीबीआई जांच की याचिका को भी अनुमति का इंतजार है।

मशहूर गीतकार संतोष आनंद के बेटे संकल्प आनंद ने 15 अक्तूबर 2014 को पत्नी नरेश नंदिनी के साथ ट्रेन के आगे कूद कर आत्महत्या कर ली थी। दंपति अपनी 10 साल की बेटी को भी साथ लेकर ट्रेन के आगे कूदे थे लेकिन वह बच गई। रेल ट्रैक के पास ही खड़ी से संकल्प की कार से पुलिस ने 10 पेज का सुइसाइड नोट बरामद किया था जिसने इस मामले को हाईप्रोफाइल बना दिया।
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अंग्रेजी भाषा में लिखे इस सुइसाइड नोट पर संकल्प और उनकी पत्नी के हस्ताक्षर थे, जिसमें दिल्ली के रोहिणी सेक्टर आठ स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण विधि विज्ञान अपराध शास्त्र संस्थान में 250 करोड़ के घोटाले और लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की हेराफेरी की बात लिखी थी।

संकल्प इस संस्थान में अस्थाई प्रवक्ता के रूप में कार्यरत थे। सुइसाइड नोट में एलएनजेपी फोरेंसिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक पद पर चुके यूपी पुलिस के डीजी कमलेन्द्र, डीआईजी संदीप मित्तल सहित 38 लोगों पर संकल्प को परिवार सहित आत्महत्या के लिए प्रेरित करने के आरोप लगाए गए थे।

इस प्रकरण में संकल्प के पिता संतोष आनंद की तहरीर पर सुइसाइड नोट को आधार मानकर कोसीकलां थाने मेें डीजी कमलेंद्र, डीआईजी संदीप मित्तल सहित 38 लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने की रिपोर्ट दर्ज की गई। लेकिन, एक साल बाद भी मामले का खुलासा तो दूर इसकी विवेचना तक पूरी नहीं हो पाई है। दो बार विवेचना कोसीकलां थाने से मथुरा क्राइम ब्रांच ट्रांसफर की गई। वर्तमान में क्राइम ब्रांच से ही विवेचना जारी है। चार माह से तो इसमें कोई प्रगति नहीं हुई है।

सीबीआई जांच के लिए लिखा गया पत्र
इस प्रकरण की बेहद जटिल और उलझाऊ प्रक्रिया और नामजद आरोपियों में पुलिस के ऊंचे औहदे वालों को देखते हुए मथुरा की तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी ने जांच सीबीआई से कराने के लिए पत्र लिखा था। इसका अनुमोदन डीआईजी, आईजी आगरा और डीजीपी व राज्य सरकार ने किया। अब यह याचिका गृह मंत्रालय में लंबित है। फिलहाल विवेचना क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर डीएस सेंगर कर रहे हैं।

आईजी अमिताभ ठाकुर ने दर्ज कराए थे बयान
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के खिलाफ फोन पर धमकी देने की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले और वर्तमान में निलंबित चल रहे यूपी पुलिस के आईजी अमिताभ ठाकुर ने भी संकल्प आनंद प्रकरण में मथुरा आकर विवेचक को अपने बयान दर्ज कराए थे। अप्रैल माह में आईजी अमिताभ ठाकुर डीजी कमलेंद्र के साथ ही कार्यरत थे। उस दौरान वे मथुरा आकर तत्कालीन एसएसपी मंजिल सैनी से मिले और डीजी कमलेंद्र के कार्य व्यवहार को सुइसाइड नोट में लिखी बातों से समरूप बताते हुए बयान दर्ज कराए थे।

डीजी के खिलाफ विवेचना दरोगा को
इस हाईप्रोफाइल मामले की जांच में विवेचना मजाक बनकर रह गई है। मामले में नामजद डीजी कमलेंद्र, डीआईजी संदीप मित्तल जैसे बड़े अधिकारी की विवेचना क्राइम ब्रांच के दरोगा से कराई जा रही है।
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हाईप्रोफाइल प्रकरण
 - 2009 से जून 2014 तक निदेशक पद पर कार्यरत रहे डीजी कमलेन्द्र
- जून 2011 में हुई थी संकल्प आनंद की नियुक्ति
- डीजी कमलेंद्र के कार्यकाल में उनके स्थान पर नौ मदों का कार्य देखते थे संकल्प
- सामान की खरीद, निविदाओं का आवंटन सहित कई कामों में था हस्तक्षेप
- संकल्प के निजी खाते में आरटीजीएस और चेक से डाली गई थी करोड़ों की रकम
- बैंक ऑफ महाराष्ट्रा की रोहिणी शाखा में खुले संकल्प के खाते से हुआ था मोटा लेनदेन  
- सारंग, हफीफ डेवलपर्स अंधेरी मुंबई सहित अन्य कंपनियों के नाम जारी किए थे करोड़ों के चेक
- इंटरजन कंपनी के नाम हुआ था एग्रीमेंट
- संकल्प को स्थायी नियुक्ति देने का लालच देने का आरोप
- 38 में 28 को हो जारी हो चुके हैं नोटिस, केवल आठ ने दर्ज कराए बयान
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