कोसीकलां में मथुरा-दिल्ली रेललाइन पर दंपति संकल्प आनंद और नरेश नंदिनी आनंद की आत्महत्या का मामला एक बार फिर विवेचना के लिए क्राइम ब्रांच के दरोगा यशकांत सिंह को दिया गया है। तीन बार विवेचना बदलने जाने क े दौरान किसी दरोगा ने इसे ग्रहण नहीं किया। आखिरकार विवेचना पुराने दरोगा को सौंप दी गई।
बीते साल 15 अक्तूबर को हुए इस मामले के साथ लोकनायक जयप्रकाश नारायण अपराध विधि विज्ञान शास्त्र नई दिल्ली में 250 करोड़ के घोटाले का मामला भी जुड़ा है। संकल्प आनंद इस संस्थान में कार्यरत थे। आनंद दंपति ने अपने सुइसाइड नोट में संस्थान के तत्कालीन निदेशक डीजी यूपी पुलिस कमलेंद्र और डीआईजी संदीप मित्तल सहित 26 लोगों पर आत्महत्या के मजबूर करने का आरोप लगाया है। अधिकतर घोटाले में भी आरोपी हैं।
18 अक्तूबर को थाना कोसीकलां में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद मथुरा क्राइम ब्रांच ही मामले की विवेचना कर रही थी। बाद में विवेचना को डीजीपी के आदेश के चलते कोसीकलां थाने में ट्रांसफर कर दिया गया। एक हफ्ते बाद संगीन मामला मानते हुए फिर से क्राइम ब्रांच से विवेचना कराने को कहा गया। दो सप्ताह पहले विवेचना क्राइम ब्रांच में आई तो कोई दरोगा इसे ग्रहण करने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद इसे पहले विवेचना का कार्य कर रहे एसआई यशकांत सिंह को दिया गया। यशकांत सिंह ने कोसीकलां पुलिस से विवेचना ग्रहण कर ली है।