कलौलीतीर की दलित बस्ती के लोग पानी को तरस रहे हैं। गांव में लगे चार
हैंडपंपों में तीन खराब हैं और एक हैंडपंप करीब 500 लोगों की प्यास बुझा
रहा है। फिलहाल पानी के लिए लोगों को दूरदराज जाना पड़ता है। यही हाल
कलौलीजार गांव के लोगों का है। मुस्लिम बस्ती में लगे एक हैंडपंप पर दो सौ
परिवार निर्भर हैं। भीषण गर्मी में दलित बस्ती के करीब पांच सौ लोगों के
लिए जूझना पड़ रहा है। इकलौते हैंडपंप पर सुबह पांच बजे से ही लाइन लग जाती
है।
खराब होने पर कई बार प्रधान से कहा लेकिन उसके न सुनने पर लोगों
ने आपस में चंदा कर सुंदरलाल के दरवाजे का हैंडपंप ठीक कराया है। रामकृपाल
यादव का कहना है कि खराब हैंडपंपों को दुरुस्त कराने के लिए ग्राम पंचायत
में बजट आ रहा है।
लेकिन प्रधान और पंचायत मित्र मिलकर कागजों में हैंडपंप
दुरुस्त होना दर्शा रहे हैं। ज्ञान सिंह, माखन सिंह, उजागर सिंह, श्रीराम
महाराज, लल्लू, दिनेश के दरवाजे पर लगे हैंडपंप छोटी-छोटी खराबियों से बंद
हैं।
इसी तरह कलौलीजार में भी पानी का संकट है। मुस्लिम बस्ती में एक मात्र
हैंडपंप है। फैय्याज का कहना है कि पीने के पानी का इंतजाम करने में आधा
समय बीत जाता है। तड़के उठाना पड़ता है।
बच्चों को स्कूल भेजने में देरी से
बचने के लिए पहले पानी भरते हैं। वहीं रतिया के दरवाजे पर लगा हैंडपंप
कीचड़युक्त पानी फेंकता है। जूनियर स्कूल में बाउंड्री के अंदर लगे हैंडपंप
से पानी भरना पड़ता है। इसमें भी दिन भर भीड़ रहती है। लालदीवान के दरवाजे
लगा हैंडपंप रिबोर लायक है।
इंद्रपाल सोनकर, डीपीआरओ ने कहा कि
हैंडपंपों में हल्की फुल्की कमी दूर करने के प्रधानों को निर्देश दिए जा
चुके हैं। अगर इस कार्य में कोई प्रधान हीलाहवाली करता है तो उसके खिलाफ
शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। हां अगर हैंडपंप रिबोर लायक है तो उसकी
सूचना जलनिगम को भेजी जाएगी।