रविवार की शाम को गोवर्धन चौराहे पर एक डग्गामार बस ने सड़क पार कर रही महिला को कुचल दिया। इससे गुस्साई भीड़ ने बस में आग लगा दी और महिला का शव दिल्ली-आगरा हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया। यहां पहुंची पुलिस पर पथराव किया गया। पुलिसकर्मियों को पीटा भी गया। फोर्स बढ़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें करीब दस लोग घायल हो गए हैं। इस बवाल के दौरान दो घंटे तक हाईवे जाम रहा।
मथुरा से आगरा तक सनसनी फैलाने वाली ये घटना हाईवे थाना क्षेत्र में गोवर्धन चौराहे पर शाम को पांच बजे की है। यहां बलदेव के छोली मीरपुर निवासी भगवान देवी (50) को सड़क पार करते वक्त बस ने कुचल दिया। महिला की मौके पर ही मौत हो गई। भगवान देवी अपने पति मदन के साथ असगरपुर में बाबा बालकदास के भंडारे से प्रसाद लेकर लौट रही थी। महिला की मौत के बाद भीड़ इकट्ठा हो गई। भगवानदेवी का बेटा नरेंद्र भी गोवर्धन चौराहे पर एक ब्लड बैंक में काम करता है लिहाजा वह भी अपने साथियों के साथ पहुंच गया।
भीड़ बढ़ने पर बवाल शुरू हो गया। गुस्साए लोगों ने पेट्रोल छिड़कर बस में आग लगा दी। महिला का शव हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया गया। फायर ब्रिगेड की गाड़ी पहुंची तो उस पर पथराव कर दिया। ट्रैफिक पुलिस की जीप पर पथराव किया गया। ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को गाड़ी से खींचकर उन पर हमला कर दिया गया। पुलिस अफसरों के साथ जमकर नोकझोंक हुई। बवाल नहीं रुका तो पुलिस ने हाईवे जाम किए बैठी भीड़ पर लाठीचार्ज कर दिया। लाठीचार्ज में दस लोग घायल हो गए। पांच बजे बंद हुआ हाईवे सात बजे खुल सका।
वर्दी देखकर भड़क रही थी भीड़
दरअसल लोगों में गुस्सा पुलिस को लेकर था। वर्दी वालों को देखकर लोग भड़क रहे थे। उनका कहना था कि जो भी डग्गामार बसें चल रही हैं वह पुलिस संरक्षण में चल रही हैं। अगर पुलिस यहां ट्रैफिक को कंट्रोल करने लगे तो हादसे न हों। भीड़ में शामिल लोग पुलिस पर वसूली के आरोप लगा रहे थे। लोगों का कहना था कि चेकिंग के नाम पर भी लोगों से पैसे लिए जाते हैं। आम आदमी के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है जबकि डग्गामार गाड़ियों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।
गोवर्धन चौराहे पर दुकान करने वाले लोगों का कहना था कि जो भी हादसा हो रहा है उसके लिए पुलिस ही जिम्मेदार है। कहीं भी वाहन खड़े हो जाते हैं मगर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। कई दफा पुलिस वालों से कहा गया कि सड़क किनारे गाड़ियों को न खड़ा होने दें लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। पुलिस के आला अफसर भी खामोश रहते हैं। भीड़ ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ खूब नारेबाजी की। कहा कि अधिकारियों ने ट्रैफिक व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। अतिक्रमण हटवाया जाता है मगर पैसे लेकर फिर करा दिया जाता है।