रिफाइनरी की पाइप लाइन से तेल चोरी करने वाले तेल माफिया के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
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रिफाइनरी से तेल सप्लाई का शेड्यूल लीक हो रहा था। पाइप लाइन में कब पेट्रोल चलेगा और कब डीजल इसकी जानकारी माफिया को पहले से हो जाती थी। पेट्रोल आने की सूचना मिलते ही टैंकर लगा दिए जाते थे। बताया जा रहा है कि अट्ठारह महीने में सबसे ज्यादा डीजल की चोरी हुई है।
मथुरा रिफाइनरी से जालंधर जा रही पाइप लाइन में कृष्णा विहार में एटीवी फैक्ट्री के पास सेंधमारी करके तेल चोरी की जा रही थी। बाकायदा सुरंग बनाकर तेल निकाला जा रहा था।
17 फरवरी को इसकी जानकारी हुई थी। पुलिस ने 20 जनवरी को एक पेट्रोल पंप मालिक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। इनसे पूछताछ में पता चला कि ये लोग पिछले 18 महीनों से तेल की चोरी कर रहे थे। 100 करोड़ रुपये से अधिक की तेल चोरी करने की बात सामने आई। तेल चोरी के इस नेटवर्क का सरगना आगरा का पेट्रोल पंप व्यवसायी मनोज गोयल है जो अभी तक फरार चल रहा है। उसके भी आगरा में कई पेट्रोल पंप हैं।
पुलिस जांच में अब एक बात निकलकर सामने आ रही है कि माफिया को रिफाइनरी से सप्लाई होने वाले तेल के शेड्यूल की जानकारी तत्काल हो जाती थी। इसी जानकारी के आधार पर वह अपने टैंकर मंगवा लेते थे, जहां पाइप लाइन में वाल्व लगाकर चोरी की जा रही थी। इससे साफ है कि रिफाइनरी में ही कोई भेदिया है जो माफिया को पूरा शेड्यूल बता दिया करता था। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। पुलिस पूछताछ में जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक रिफाइनरी की पाइप लाइन से डीजल की चोरी सबसे ज्यादा की गई है। रिफाइनरी सूत्रों का कहना है कि पाइप लाइन में तेल छूटने का जो शेड्यूल होता है वह अफसरों की मीटिंग में तय किया जाता है। एसएसपी मोहित गुप्ता का कहना है कि रिफाइनरी वालों की मिलीभगत तो है ही। वरना कब लाइन बंद होगी और कब चलेगी ये जानकारी तेल चोरी के धंधे में लिप्त लोगों तक कैसे पहुंचती।
पाइप लाइन बिछते वक्त ही लगा लिया था वाल्व
बताया गया कि जब मथुरा रिफाइनरी से टूंडला वाली लाइन डाली गई थी तब तेल माफिया ने उसमें शुरुआत में ही वाल्व लगा लिया था। इसके माध्यम से पेट्रोल और डीजल की चोरी करते रहे। जब चोरी पकड़ी गई तो एक खेत में सुरंग मिली थी।