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मुख्यमंत्री का तो आज तक नहीं आया फोन

Wed, 08 Jun 2016 12:07 AM IST
पुनीत शर्मा, अमर उजाला मथुरा
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एसपी मुकुल द्विवेदी फाइल फोटो
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हमने तो नहीं कहा था कि मुख्यमंत्री हमें फोन करें। हमारे परिवार की बात सुनें। घर पर आए बड़े अधिकारी ही कह रहे थे कि मुख्यमंत्री बहुत दुखी हैं। परिवार वालों से बात करेंगे। हमने आपका नंबर नोट करा दिया है। इतना कहकर मुकुल के पिता श्रीचंद दुबे भावुक हो गए और कहने लगे कि आज तक कोई फोन नहीं आया है।
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आपरेशन जवाहर बाग में शहीद होने वाले एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी का परिवार सिस्टम से बेहद खफा है। इन लोगों का कहना है कि उन्हें झूठी दिलासाएं दी जा रही हैं। जबकि कुछ हो नहीं रहा है। मुकुल द्विवेदी के पिता श्रीचंद दुबे तो अपनी बात कहते-कहते भावुक हो जाते हैं।

बोले, इस बात को भी पांच दिन का वक्त बीत गया है। ऐसा नहीं है कि हम फोन का इंतजार कर रहे हैं। हम तो यह कह रहे हैं कि अगर फोन करने को अधिकारियों से कहा था तो करना चाहिए था। वैसे भी उनका बेटा एक पुलिस अधिकारी था। जवाहर बाग खाली कराते वक्त शहीद हुआ है। सबसे आगे रहकर टीम का नेतृत्व कर रहा था।
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कहते-कहते उनके आंसू छलक आए। आंसुओं को पोंछते हुए कहने लगे कि कई दफा जवाहर बाग को लेकर उससे बात होती थी। कहता था, पापा हर वक्त इस बाग को लेकर ही टेंशन बनी रहती है। यह खाली हो जाए तो कुछ फ्री हो सकूंगा। लेकिन कौन जानता था कि यह जवाहर बाग उसकी जान ही ले लेगा।

   डीआईजी साहब, क्या मेरे बेटे को अकेला भेज दिया था
एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के पिता श्रीचंद दुबे ने घर पहुंचे डीआईजी अजयमोहन शर्मा से कई ऐसे सवाल पूछे जिनका वह जवाब ही नहीं दे पा रहे थे। कहा कि यह बताइए कि क्या उनके बेटे को अकेले ही जवाहर बाग में भेज दिया था। इस पर डीआईजी ने कहा कि फोर्स साथ में थी।

एसपी सिटी के पिता ने कहा कि अगर फोर्स थी तो वहां कहां चली गई थी। किसी दूसरे पर तो हमला हुआ नहीं है। मेरे बेटे की ही उन्होंने क्यों जान ली। जो पुलिस वाले उसे अकेला छोड़कर चले गए थे उन पर क्या कार्रवाई हुई। ऐसे लोगों को तो फोर्स में रहने का अधिकार ही नहीं है।
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