जिला जेल में गैंगवार के बाद पूरा जेल प्रशासन कठघरे में आ गया है। घटना से साफ जाहिर है कि जेल में अपराधियों का राज चलता है और जेल प्रशासन उनके आगे नतमस्तक है।
जिला जेल में खुलेआम गोलीबारी के बाद पुलिस अधिकारी तक यही सवाल करते नजर आए कि आखिर जेल में हथियार कैसे पहुंच गए। गैंगवार के बाद एक पिस्टल और एक तमंचा मिला है। पिस्टल, तमंचा और कारतूस बड़ी आसानी से आए।
जेल में बंद कैदियों ने सूत्रों से बताया कि जेल में आए दिन तमंचे लहराए जाते हैं। डीआईजी लक्ष्मी सिंह भी गैंगवार पर चकित नजर आईं। उन्होंने भी जेल में हथियार आने पर सवाल उठाया। और तो और गैंगवार होते ही कैदियों ने तमाम हथियार छुपा भी दिए।
बताया तो यहां तक गया है कि एक पिस्टल और थी जिसे छुपा दिया गया है। जिला पुलिस के पहुंचते ही जेल की हर बैरक में अव्यवस्था बताई गई। नशे का ढेर सारा सामान बरामद हुआ। दो थैले में गांजा और मादक पदार्थ की कई पुड़िया मिलीं।
धन के बूते हर ऐश ओ आराम
जेल में बंदियों का सिक्का चलता है। इसके लिए माफिया मोटी रकम खर्च करते हैं। जेल में जिसकी तरफ से जितने अधिक रुपये आते हैं उसे उतना ही ऐश ओ आराम दिया जाता है। जब भी प्रशासनिक अधिकारियों की टीम औचक निरीक्षण को आती है तो आननफानन में जेल के कुछ लोग ही कैदियों की मदद करके उनका नशे का सामान, हथियार और मोबाइल आदि छुपा देते हैं। शनिवार की घटना के बाद जेल से निकले कुछ पुलिसकर्मी यह कह रहे थे कि यहां तो पूरी अराजकता है और ऐसा लगता है कि जेल को कैदी ही चला रहे हैं।
17 दिन में सस्पेंड हो गए जेल अधीक्षक
मथुरा जेल के अधीक्षक राकेश कुमार में महज 17 दिनों में ही सस्पेंड हो गए। उन्होंने एक जनवरी को यहां कार्यभार संभाला था। वह अभी जेल को ठीक से समझ भी न पाए थे कि अचानक जेल में गैंगवार और हत्या हो गई।