मिड-डे मील में मिले दूध को पीकर दो बच्चों की मौत और बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार होने के बाद खाद्य विभाग हरकत में आया। खाद्य विभाग और औषधि विभाग की टीम ने गुरुवार की दोपहर अक्षयपात्र में रसोई का निरीक्षण किया। दूध और पानी के सैंपल भी भरे। अक्षयपात्र के अधिकारियों ने मामले में अपने को निर्दोष बताया है।
गुरुवार की दोपहर मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी वीके राठी, खाद्य सुरक्षा अधिकारी नंदकिशोर, डा. शैलेंद्र रावत, डा. सबिता शर्मा, खाद्य सहायक हुकुम सिंह, औषधि निरीक्षक दीपक कुमार ने सबसे पहले अक्षयपात्र की रसोई का निरीक्षण किया।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि बुधवार को वितरित हुए अमूल दूध और पानी के दो-दो नमूने लिए गए हैं। ये अमूल कंपनी के होमोजिनाइज्ड टोंड अमूल मोती दूध के हैं। उत्पादन तिथि 19 मार्च, 2016 की है। अक्षयपात्र संस्था के क्रय अधिकार राजेंद्र मंडल ने कहा कि उन्होंने अमूल कंपनी से अमूल मोती दूध क्रय किया। यह दूध 90 दिनों तक नुकसान नहीं कर सकता है।
मामले में पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है। एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के निर्देश पर गुरुवार की दोपहर अक्षय पात्र पहुंची पुलिस ने दूध के आठ पैकेट सीज किए।
संस्था की ओर से मिड-डे मील के अंतर्गत आने वाले परिषदीय स्कूलों में बुधवार को दूध बांटा गया था। जिन बच्चों की मृत्यु हुई है उनमें से एक बच्चा आंगनबाड़ी का है। हमारे द्वारा बांटे गए दूध से बच्चों की मृत्यु नहीं हुई।
-कमल योगी, पीआरओ अक्षय पात्र
जांच के बाद भेजा भेाजन
वृंदावन। अक्षय पात्र ने गुरुवार को स्कूलों में रोटी और मिक्स सब्जी का वितरण किया। अधिकारियों ने स्वयं भोजन को चखकर उसकी जांच की। इसके बाद ही भोजन को स्कूलों में वितरण के लिए भेजा गया।