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दो साल से अवैध कब्जे में है जवाहर बाग

Mon, 04 Apr 2016 11:25 PM IST
अमर उजाला मथुरा
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दो साल से अवैध कब्जे में है जवाहर बाग - फोटो : अमर उजाला
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कभी सिविल लाइन क्षेत्र में रहने वाले प्रशासनिक अफसर, कर्मचारी और आम लोगों के लिए सुबह घूमने का बेहतरीन स्थान होने वाला जवाहर बाग दो साल से अवैध कब्जे में है। इतना ही नहीं यहां उद्यान विभाग की बेहतरीन नर्सरी थी जो अब पूरी तरह नष्ट हो चुकी है।
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एक जनवरी 2014 को पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से संगठित करीब एक हजार लोगों नेे मध्य प्रदेश के सागर से चलकर दिल्ली जंतर-मंतर तक पहुंचने के लिए मथुरा स्थित जवाहर बाग में डेरा डाला था। प्रशासन द्वारा चंद दिन पहले ही इस स्थल को धरना-प्रदर्शन के लिए चिह्नित किया गया। यहां डेरा जमाने के बाद इन लोगों का जवाहर बाग में स्थापित जिला उद्यान अधिकारी कार्यालय के कर्मचारियों से विवाद होने लगा। डेरा जमाने वालों ने आम, आंवला, बेर सहित अनेक बाग उजाड़ दिए। ठेेकेदार के साथ मारपीट की। आम लोग बाग में जाने से कतराने लगे। डेरा डालने से इससे पहले बरेली से खदेड़ा गया था।

प्रशासनिक अफसरों ने इस समस्या को सुलझाने की कोशिश की तो खुद को सत्याग्रही बताने वालों ने उन पर हमला कर दिया। तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सहित पुलिस अधिकारियों ने किसी तरह अपनी जान बचाई। ऐसे कई मामलों में अब तक 12 रिपोर्ट इन लोगों के खिलाफ दर्ज हो चुकी हैं लेकिन अब तक न तो पुलिस की हिम्मत इन्हें गिरफ्तार करने की हुई, न ही प्रशासनिक अफसर जवाहर बाग को कब्जा मुक्त कराने की हिम्मत जुटा सके हैं। इसी के विरोध स्वरूप एक पखवाडे़ पहले पिटे उद्यानकर्मी डीएम कार्यालय पर धरना दे रहे हैं।
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मौन शासन, असहाय प्रशासन 
जवाहर बाग की नियंत्रण से बाहर होती स्थिति की रिपोर्ट कई बार शासन को भेजी जा चुकी है। जिला प्रशासन ने मामले से निपटने के लिए केंद्रीय पुलिस बल की मांग की है लेकिन शासन का सकारात्मक जवाब न मिलने के कारण प्रशासनिक अफसर असहाय महसूस कर रहे हैं। डीएम आफिस से चंद कदम की दूरी पर उद्यान विभाग की करीब 200 एकड़ जमीन कब्जाने की रिपोर्ट मिलने के बाद भी शासन की चुप्पी तमाम सवाल पैदा करने वाली है। कहा जा रहा है कि उद्यान कर्मियों के दबाव के बाद जवाहर बाग की बिजली काट दी गई थी लेकिन उच्च स्तरीय दबाव के बाद इसे आनन-फानन में कुछ समय बाद ही जोड़ दिया गया। इतना ही नहीं यहां तक पहुंचने वाली रसद को भी किसी स्तर पर नहीं रोका जा रहा है। 

एक जाति विशेष के लोग
जवाहर बाग कब्जाने वाले अधिकांश लोग एक जाति विशेष के हैं। इनका प्रदेश स्तर पर बड़ा राजनीतिक दखल है। इसमें भी युवाओं की संख्या कम और बच्चे व महिलाओं की संख्या ज्यादा है। इनका नेतृत्व करने वालों ने अब तो जमीन कब्जाने में साथ आए परिवारों को जवाहर बाग में प्लाट भी आवंटित कर दिए हैं। इन पर झोपड़ी बना ली गई हैं।  

कुंवर सिंह निषाद को किया नजरबंद
गोकुल बैराज जमीन अधिग्रहण की 16 साल पुरानी समस्या के समाधान में निर्णायक भूमिका निभाने वाले भाजयुमो के प्रदेश महामंत्री कुंवर सिंह निषाद को जिला प्रशासन ने नजरबंद कर दिया था। सोमवार को सुबह नौ बजे ही पुलिस ने उन्हें उनके घर पर रोक दिया। प्रशासनिक अफसरों को डर था कि आसपास के ग्रामीणों के साथ कुंवर सिंह निषाद जवाहर बाग को खाली कराने के लिए खुद ही आक्रामक कदम उठा सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के समक्ष परेशानी पैदा हो जाएगी। इससे निपटने के लिए कुंवर सिंह को जवाहर बाग के लिए निकलने से पहले ही घर पर कैद कर दिया गया।
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