सीडीपीओ देहात के दफ्तर में बाल मजदूरी का मामला उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग तक पहुंच गया है। संस्था जस्टिस फॉर चिल्ड्रन के संयोजक सतीश शर्मा ने आयोग इसकी जानकारी दी। अमर उजाला के 19 जून के अंक में यह खबर प्रकाशित होने के बाद सीडीओ भी मामले की जांच के आदेश दे चुके हैं।
हाल ही में जिला पंचायत परिसर में स्थापित बाल विकास परियोजना देहात के कार्यालय में बाज मजदूरी का मामला सामने आया था। इसमें बाल पोषाहार के लिए आने वाली पंजीरी के बोरों को ट्रक से उतारने का काम बच्चों से कराने की खबर अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी।
इसमें यह भी बताया गया था कि बच्चों को काम के बदले डेढ़ रुपये प्रति बोरा मजदूरी मिल रही थी। इसके लिए पहले उन्हें 50 पैसे प्रति बोरा कमीशन भी देना पड़ता था। सरकारी कार्यालय में मौजूद अधिकारी और कर्मचारियों के दिशा निर्देश के तहत पंजीरी से भरे ट्रक को तेज धूप में यह बाल मजदूर खाली कर रहे थे।
हालांकि, मामले में जब प्रभारी डीपीओ अनिल दत्ता से पूछा गया तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह जिम्मेदारी ट्रक चालक की है। लेकिन, अमर उजाला में प्रकाशित खबर का संज्ञान लेने के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने मामले की जांच एसडीएम से कराने के आदेश दिए। अब इसकी शिकायत जिले में बच्चों की दशा, बाल मजदूरी सहित विभिन्न बिंदुओं पर काम करने वाली संस्था जस्टिस फार चिल्ड्रन के संयोजक सतीश शर्मा ने उत्तर प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग से की है।