छाता/मथुरा। वर्ष 1994 में छाता के तत्कालीन एसडीएम पीके पांडेय ने छाता निवासी श्यामवती के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि युवती ने एसडीएम न्यायालय के समक्ष अपने जूते फेंके। उक्त प्रकरण में जेएम न्यायालय छाता की न्यायाधीश स्वाति सिंह ने 26 वर्ष बाद फैसला सुनाते हुए श्यामवती को दोषी माना है।
4 मई 1994 को सुबह 11 बजकर 40 मिनट पर तत्कालीन परगना मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अपने कार्यालय पर बैठकर सरकारी कार्यों का संपादन कर रहे थे, तभी श्यामवती निवासी छाता जनपद मथुरा कुछ महिलाओं को लेकर उनके कार्यालय में आई और अभद्रतापूर्ण व्यवहार करते हुए न्यायालय के समक्ष जूते फेंके। इसके बाद श्यामवती के खिलाफ थाना छाता में मुकदमा दर्ज कराया गया, जिसमें गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा मुकदमे का ट्रायल जेएम कोर्ट छाता में कराया गया। तब से श्यामवती जमानत पर थी।
अब 26 वर्ष बाद श्यामवती को अपराध में दोषी पाते हुए दो सप्ताह के अंदर जिला प्रोबेशन अधिकारी मथुरा के यहां 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र और अंडरटेकिंग दाखिल करते हुए 6 माह की अवधि तक सदाचरण बनाए रखने एवं प्रत्येक माह की 10 तारीख को जिला प्रोबेशन अधिकारी मथुरा के कार्यालय में उपस्थित होने के लिए आदेशित किया गया है। श्यामवती के अधिवक्ता प्रहलाद चौधरी ने बताया कि महिला काफी बुजुर्ग है। इसलिए न्यायालय ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए तथा अपराधी परिवीक्षा अधिनियम की धारा 4 का लाभ देते हुए 6 माह का सदाचरण बनाये रखने के लिए आदेशित किया है।