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छह महीने में दो करोड़ की जब्त शराब डकार गए पुलिसवाले

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मथुरा। हरियाणा बॉर्डर की कोटवन पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मी पिछले छह महीने में जब्त की गई करीब दो करोड़ रुपये की शराब ठिकाने लगा चुके हैं। प्राथमिक जांच में इस तरह के तथ्य सामने आए हैं। हालांकि यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है। क्योंकि शराब की तस्करी के लिए कोटवन पुलिस चौकी क्षेत्र लंबे समय से कुख्यात रहा है। तस्करी की शराब बेचने में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता भी उजागर होती रही है। बुधवार को हुए खुलासे के बाद से पुलिस प्रशासन में हड़कंप मचा है। बताया जा रहा है कि प्राथमिक जांच में शराब तस्कर विष्णु को संरक्षण देेने वाले कई सफेदपोशों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी गोपनीय जांच की जा रही है।
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थाना हाइवे क्षेत्र में हुए डाक्टर के अपहरण मामले में पुलिस पर लगा रुपये लेने का दाग अभी धुला भी नहीं है कि एक और बड़ा दाग खाकी पर लग गया है। कोटवन पुलिस चौकी पर तैनात पुलिसकर्मियों द्वारा जब्त की गई तस्करी की शराब को बेचने का मामला खुलने के बाद पुलिस अधिकारियों के होश उड़े हुए हैं। आनन-फानन अधिकारी जांच में जुट गए हैं। पुलिसकर्मियों ने कितनी शराब बेची, इसकी सच्चाई जानने के लिए सीओ छाता जगदीश कालीरमन तथा एसपी देहात श्रीश श्रीचंद्र द्वारा कोटवन चौकी के रिकॉर्ड के साथ भौतिक सत्यापन किया जा रहा है।
एसपी देहात श्रीश श्रीचंद्र ने बताया कि भौतिक सत्यापन के बाद ही पता लगेगा कि पुलिसकर्मियों द्वारा शराब माफिया के साथ मिलकर कितनी शराब बेची गई थी। प्राथमिक जांच में पता चला है कि पिछले छह महीने में दो करोड़ रुपये की जब्त शराब बेची गई, जिसमें पुलिसकर्मियों की संलिप्तता सामने आई है। शराब तस्कर विष्णु का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। पता लगाया जा रहा है कि किन-किन पुलिसकर्मियों से तस्कर के संबंध रहे हैं।
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ढाई साल पहले कोटवन पुलिस चौकी हुई थी लाइन हाजिर
करीब ढाई वर्ष पहले तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी को जब कोटवन पुलिस चौकी की संलिप्तता से अवैध शराब के धंधे का पता चला तो पुलिस चौकी को लाइनहाजिर कर दिया था परंतु जैसे ही चौधरी का तबादला हुआ पुलिस-तस्कर गठजोड़ फिर हावी हो गया। वर्ष 2018 की आखिर में एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने अपने विभाग की दो बड़ी कमजोरियों पर वार किए थे। जिसमेें पहली कमजोरी कोटवन चौकी थी तो दूसरी एसओजी। एसएसपी के पास सूचना थी कि कोटवन चौकी पर अवैध शराब के साथ अन्य कारनामे भी हो रहे हैं। एसएसपी ने इसके बाद सख्ती की तो शराब का अवैध धंधा रुका रहा परंतु उनके जाते ही यह और जोर-शोर से चल निकला।
चौकी और पीआरबी पर आंच, थानेदार साफ
कोटवन चौकी पर होने वाली हर गतिविधि की जब कोसीकलां थाना पुलिस को जानकारी रहती है तो क्या शराब तस्करी के इतने बड़े खेल की जानकारी थाना पुलिस और अन्य पुलिस अधिकारियों को नहीं होगी। यह बड़ा सवाल है। कोटवन चौकी के माध्यम से जब भी शराब पकड़ी जाती है तो उसकी एफआईआर कोसीकलां थाने में ही होती थी। इस एफआईआर पर चार्जशीट या एफआर लगाने का अधिकार भी कोसीकलां थाने का ही होता है। इसी प्रकार से अवैध शराब के निस्तारण संबंधी या फिर उसको नष्ट करने संबंधी रिपोर्ट भी चौकी द्वारा कोतवाली को दी जाती है। तो इतनी महत्वपूर्ण जानकारी कोतवाली पुलिस तथा अन्य अधिकारियों को क्यों नहीं हुई। जानकारी रहे कि 20 मार्च को कोसीकलां थाना प्रभारी दुर्गेश कुमार का गैर जनपद को स्थानांतरण हुआ। इसके बाद से थाने की जिम्मेदारी आजादपाल सिंह के पास है। उनका कहना है कि उन्होंने इस प्रकार की शिकायतें मिलने पर अधिकारियों को जानकारी दी थी।
एसएसपी ने अधिकारियों से मांगी हर थाने की रिपोर्ट
पुलिसकर्मियों के अवैध शराब के धंधे में लिप्त पाए जाने से सन्न अधिकारियों ने पूरे जनपद में फैले शराब माफिया तक अपना जाल फैला दिया है। एसएसपी ने इसके लिए कुछ विशेष अधिकारियों को चिन्हित कर थानों की रिपोर्ट देने को कहा है। सभी सीओ को निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने-अपने क्षेत्र के थानों की जानकारी दें कि उनके यहां पर पकड़ी गई अवैध शराब की स्थिति क्या है।
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