मथुरा। बाबा जयगुरुदेव जी के शिष्य रामवृक्ष यादव के गुरुभाई राजनारायण शुक्ला द्वारा सीजेएम राकेश सिंह की अदालत दिए गए प्रार्थनापत्र पर सोमवार को भी सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने सुनवाई के लिए २५ अप्रैल की तारीख तय की है। प्रार्थनापत्र के वादी राजनारायण शुक्ला अदालत नहीं आ सके।
बस्ती निवासी राजनारायण शुक्ला द्वारा दो जून २०१६ की वारदात का हवाला देते हुए बताया है कि दो जून २०१६ को पुलिस मेरे सामने पुलिस लाइन ग्राउंड से हत्या के उद्देश्य से नेताजी (रामवृक्ष यादव) को पकड़ कर ले गई थी। जिनका अभी तक कुछ पता नहीं चल सका है। उन्होंने अदालत से बंधक बनाने वालों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर जांच की प्रार्थना की है। उन्होंने बताया कि वारदात के समय रामवृक्ष यादव के साथ हरनाथ, अमित गुप्ता आदि मौजूद थे।
अचानक पुलिस ने हमला कर दिया, जिसमें बहुत सारे लोग मारे गए। हम किसी प्रकार से पुलिस लाइन के हैलीपैड पर पहुंच गए। जहां पर कुछ पुलिस वाले आए और वह रामवृक्ष यादव को बोलेरो में जबरन डालकर हत्या के उद्देश्य से अपहरण करके ले गए। आशंका है कि नेताजी को पुलिस ने बंधक बनाकर रखा है। राजनारायण ने अदालत से प्रार्थना की है कि रामवृक्ष यादव का अपहरण करने वालों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच कराई जाए तथा पता किया जाए कि इस समय रामवृक्ष यादव कहां हैं।
अधिवक्ता एलके गौतम ने बताया कि अदालत ने अभी तक राजनारायण के प्रार्थनापत्र पर सुनवाई नहीं की है। ११ अप्रैल को अदालत में शोकावकाश होने के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने सुनवाई के लिए २५ अप्रैल की तारीख तय की है।
मृत्यु प्रमाणपत्र के बिना अटक गई रामवृक्ष की धनराशि
दरअसल, रामवृक्ष यादव के परिजन को उनकी मौत के रहस्य के खुलासे से ज्यादा वर्तमान मेें मृत्यु प्रमाणपत्र की आवश्यकता है। जिससे रामवृक्ष यादव का बैंक खातों का पैसा परिजन को मिल सके। यह पैसा बिना मृत्यु प्रमाणपत्र के नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते परिजन ने स्थानीय अदालत के अलावा हाईकोर्ट की शरण भी ली है। अधिवक्ता ने बताया कि रामवृक्ष की धनराशि के लिए बैंक में वारिसान की आवश्यकता है और वारिसान प्रमाण बिना मृत्यु प्रमाणपत्र के नहीं मिल सकता है।